चना की फसल पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फली छेदक और दीमक से 60 % तक नुकसान की आशंका

चना की फसल पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फली छेदक और दीमक से 60 % तक नुकसान की आशंका
News Banner Image

Kisaan Helpline

Agriculture Jan 27, 2026

(किसानों के लिए जरूरी चेतावनी और बचाव की पूरी जानकारी)

रबी सीजन में चना हजारों किसानों की आय का मुख्य स्रोत है। इस समय चना की फसल पर फली छेदक कीट, दीमक और उकठा रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि समय रहते इनकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि विभाग के अनुसार मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ा है। सही समय पर उचित प्रबंधन न होने पर चना की पैदावार में 30 से 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

 

फली छेदक: चना की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला कीट

फली छेदक चना की फसल का सबसे खतरनाक कीट माना जाता है।

शुरुआती अवस्था में यह कीट मुलायम पत्तियों और तनों को खाता है। बाद में यह फलियों में छेद कर अंदर के दानों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उपज और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है।

 

 फली छेदक से बचाव के उपाय

  •       खेत में फेरोमोन ट्रैप या सोलर इन्सेक्ट ट्रैप लगाएं

  •       मित्र कीटों को संरक्षण दें

  •       अनावश्यक दवाओं का छिड़काव न करें

 

अधिक प्रकोप की स्थिति में इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी, स्पिनोसैड 45 प्रतिशत एससी या इंडोक्साकार्ब 14.5 प्रतिशत एससी का उपयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह से किया जा सकता है। क्लोरोपाइरीफॉस और प्रोफेनोफॉस जैसी ब्रॉड स्पेक्ट्रम दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि ये लाभकारी कीटों को नुकसान पहुंचाती हैं।

 

दीमक: जड़ से फसल को कमजोर करने वाला कीट

दीमक चना की फसल को बुवाई से लेकर कटाई तक नुकसान पहुंचा सकती है। यह पौधों की जड़ों और तनों को अंदर से खा जाती है, जिससे पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं। सूखे और कम नमी वाले क्षेत्रों में दीमक का प्रकोप अधिक देखा जाता है।

दीमक से बचाव के उपाय

बुवाई से पहले या खड़ी फसल में फिप्रोनील 0.3 प्रतिशत या 0.6 प्रतिशत दानेदार को खाद के साथ मिलाकर खेत में डालना लाभकारी होता है।

 

उकठा रोग: मिट्टी से फैलने वाली गंभीर बीमारी

उकठा रोग एक मिट्टी जनित रोग है, जो चना की फसल को अचानक सुखा देता है। यह रोग बार-बार एक ही खेत में चना बोने से अधिक फैलता है।

 उकठा रोग से बचाव

  • हर वर्ष एक ही खेत में चना न बोएं

  • फसल चक्र अपनाएं

  • खेत बदलकर बुवाई करें

 

किसानों के लिए जरूरी सलाह

किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसल की नियमित निगरानी करें। शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही कृषि विभाग या विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर सही कदम उठाकर चना की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1. फली छेदक की पहचान कैसे करें?

उत्तर: फलियों में छेद, दानों का खाया जाना और हरी इल्ली का दिखाई देना फली छेदक के मुख्य लक्षण हैं।

प्रश्न 2. फली छेदक से बचाव के लिए सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?

उत्तर: सबसे पहले फेरोमोन ट्रैप लगाकर कीटों की संख्या पर नजर रखें।

प्रश्न 3. दीमक का प्रकोप किन परिस्थितियों में ज्यादा होता है?

उत्तर: सूखे, हल्की मिट्टी और कम नमी वाले खेतों में दीमक का खतरा अधिक रहता है।

प्रश्न 4. क्या हर स्थिति में कीटनाशक दवा का छिड़काव जरूरी है?

उत्तर: नहीं, केवल तब ही दवा का उपयोग करें जब कीटों का प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा से अधिक हो।

प्रश्न 5. उकठा रोग से स्थायी बचाव कैसे किया जा सकता है?

उत्तर: फसल चक्र अपनाकर और खेत बदलकर बुवाई करने से उकठा रोग का प्रभाव काफी कम किया जा सकता है।


 यह खबर किसानों को समय रहते सतर्क करने और चना की फसल को नुकसान से बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।


Smart farming and agriculture app for farmers is an innovative platform that connects farmers and rural communities across the country.

© All Copyright 2024 by Kisaan Helpline