क्या फूलों की खेती बदल रही है मध्य प्रदेश की किसानी?

क्या फूलों की खेती बदल रही है मध्य प्रदेश की किसानी?
क्या फूलों की खेती बदल रही है मध्य प्रदेश की किसानी?

Vaibhav shrivastava

14-01-2026
मध्य प्रदेश: फूलों की खुशबू से महकता हिंदुस्तान 

मध्य प्रदेश के फूलों की महक आज पूरे हिंदुस्तान में फैल चुकी है। कभी परंपरागत फसलों तक सीमित रहने वाला यह राज्य अब फूलों की खेती (Floriculture) में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और पूरे भारत में फूल उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है। यह उपलब्धि न केवल राज्य के किसानों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि आधुनिक तकनीक, अनुकूल जलवायु और सरकार की दूरदर्शी नीतियों का भी प्रमाण है।


परंपरागत खेती से आधुनिक फ्लोरीकल्चर की ओर

मध्य प्रदेश के कई जिलों में आज के युवा किसान परंपरागत खेती छोड़कर फूलों की खेती को अपना रहे हैं। कारण साफ़ है:


फूलों की खेती में अधिक और नियमित आय

कम भूमि में ज्यादा मुनाफ़ा

बाज़ार में स्थायी मांग


अब किसान यह समझ चुके हैं कि पारंपरिक फसलों की तुलना में फूलों की खेती से लगभग दोगुना मुनाफ़ा कमाया जा सकता है। इसी वजह से किसान पॉलीहाउस, शेडनेट, ड्रिप इरिगेशन और उन्नत किस्मों जैसी हाईटेक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं।


उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल

पिछले 3-4 वर्षों में मध्य प्रदेश में फूलों का उत्पादन दोगुना से भी अधिक हो गया है, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।


2021-22 में फूलों का उत्पादन: 37,648 टन

2024-25 में फूलों का उत्पादन: 5,12,914 टन


इसके साथ ही, राज्य में फूलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन तक पहुँच गई है, जिसे कृषि विशेषज्ञों द्वारा बहुत अच्छे आँकड़े माना जाता है। यह वृद्धि बताती है कि मध्य प्रदेश की जलवायु और मिट्टी फूलों की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास कम ज़मीन है।


प्रमुख फूल और उनका रकबा

मध्य प्रदेश में कई प्रकार के व्यावसायिक फूलों की खेती की जा रही है, जिनमें प्रमुख हैं:


गेंदा (Marigold): 24,214 हेक्टेयर

गुलाब (Rose): 4,502 हेक्टेयर

गुलदाउदी (Chrysanthemum): 1,709 हेक्टेयर

ग्लेडियोलस (Gladiolus): 1,058 हेक्टेयर


विशेष रूप से गुना जिले के गुलाब अब अपनी खुशबू और गुणवत्ता के कारण पेरिस और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच चुके हैं, जिससे राज्य को वैश्विक पहचान मिल रही है।


सरकार की नीतियाँ बनीं सफलता की नींव

मध्य प्रदेश सरकार फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत बागवानी (Horticulture) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


प्रमुख सरकारी योजनाएँ और सहायता


1. एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH)

फूलों की खेती पर 40% से 50% तक सब्सिडी

गेंदा, गुलाब एवं अन्य व्यावसायिक फूलों के लिए वित्तीय सहायता


2. पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना

फूलों के रकबे को बढ़ाने के लिए बीज और पौधों पर अनुदान

दतिया जैसे जिलों में किसानों को निःशुल्क पौधे और बीज उपलब्ध कराए गए


3. संरक्षित खेती (Protected Cultivation)

पॉलीहाउस / शेडनेट हाउस पर 50% अनुदान

लगभग 467 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक सहायता

जरबेरा, गुलाब जैसे उच्च मूल्य वाले फूलों के लिए विशेष रूप से लाभकारी


4. तार-फेंसिंग (बाड़बंदी) पर सब्सिडी

वर्ष 2025-26 से फूलों की फसल को जंगली जानवरों से बचाने हेतु

50% सब्सिडी का प्रावधान


किसानों के लिए अन्य सुविधाएँ

सिंचाई सुविधा: मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना के तहत सोलर पंप पर भारी सब्सिडी

ऑनलाइन पंजीयन: सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए MPFSTS पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य


निष्कर्ष

मध्य प्रदेश आज फूलों की खेती के क्षेत्र में नई पहचान और नई ऊँचाइयाँ हासिल कर रहा है। आधुनिक तकनीक, अनुकूल प्राकृतिक संसाधन और सरकार की किसान-हितैषी नीतियों ने मिलकर फ्लोरीकल्चर को एक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बना दिया है। फूलों की खुशबू के साथ अब मध्य प्रदेश की आर्थिक समृद्धि और किसान की खुशहाली भी पूरे देश में महक रही है।

Smart farming and agriculture app for farmers is an innovative platform that connects farmers and rural communities across the country.

© All Copyright 2024 by Kisaan Helpline