रबी में सरसों की खेती से बढ़ाएं कमाई, सही किस्म चुनने से मिल सकती है बेहतर पैदावार

रबी में सरसों की खेती से बढ़ाएं कमाई, सही किस्म चुनने से मिल सकती है बेहतर पैदावार
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Kisaan Helpline

Agriculture
Oct 14, 2026

कम पानी वाले खेत में कौन-सी सरसों बोएं? जानिए उन्नत किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए जरूरी बातें।

 

फसल: सरसों

मौसम: रबी

प्रमुख उत्पादक राज्य: राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य सरसों उत्पादक क्षेत्र

किस्म चुनने का आधार: क्षेत्र, बुवाई का समय, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय कृषि सिफारिश

जरूरी सावधानी: किसी भी किस्म की उपज या कमाई की गारंटी न मानें; वास्तविक परिणाम खेत और मौसम के अनुसार बदलते हैं।

 

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए अपने क्षेत्र के अनुकूल प्रमाणित किस्म चुनें, समय पर बुवाई करें, मिट्टी की जांच के आधार पर खाद दें और जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। कम पानी वाले खेत में वर्षा आधारित खेती के लिए अनुशंसित किस्म को प्राथमिकता दें।

 

रबी सीजन में किसान ऐसी फसल उगाना चाहते हैं, जिसमें पानी की जरूरत और खेती का खर्च संभालते हुए अच्छी पैदावार मिल सके। ऐसे में सरसों की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। सरसों से तेल तैयार किया जाता है, इसलिए इसकी बाजार में मांग बनी रहती है।

 

लेकिन किसान भाइयों, सिर्फ सरसों बो देने से अच्छी कमाई तय नहीं होती। इसके लिए अपने इलाके के हिसाब से सही किस्म चुनना, समय पर बुवाई करना और फसल की जरूरत के अनुसार खाद-पानी देना जरूरी है। खासकर जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा कम है, वहां किस्म का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।

 

सरसों की खेती के लिए कौन-सी उन्नत किस्में चुनें?

सरसों की किस्म चुनते समय केवल ज्यादा पैदावार के दावे न देखें। यह भी पता करें कि वह किस्म आपके इलाके, बुवाई के समय और सिंचाई की स्थिति के लिए उपयुक्त है या नहीं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सरसों अनुसंधान संस्थान ने अलग-अलग क्षेत्रों और खेती की परिस्थितियों के लिए कई किस्मों की सिफारिश की है।

 

1. पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-31

यह सरसों की ऐसी किस्म है, जिसमें तेल की मात्रा करीब 41 प्रतिशत बताई गई है। इसकी औसत बीज उपज लगभग 23.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और फसल पकने की अवधि करीब 142 दिन है।

 

यह किस्म राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कुछ निर्धारित क्षेत्रों में समय पर बुवाई वाली सिंचित खेती के लिए अनुशंसित है।

 

2. बीपीएम 1825

बीपीएम 1825 सरसों की उन्नत किस्मों में शामिल है। संस्थान के उपलब्ध विवरण में इसकी औसत बीज उपज करीब 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा लगभग 41 प्रतिशत बताई गई है।

इसे निर्धारित क्षेत्रों में समय पर बुवाई वाली सिंचित खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। यह किस्म हर तरह के खेत के लिए नहीं है, इसलिए बीज खरीदने से पहले अपने क्षेत्र में इसकी उपयुक्तता की पुष्टि करें।

 

3. बीपीएम (क्यू) 172

यह किस्म राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के निर्धारित क्षेत्रों में समय पर बुवाई वाली सिंचित खेती के लिए अनुशंसित है। इसकी औसत बीज उपज करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा लगभग 41.8 प्रतिशत बताई गई है।

 

4. बीपीएम 11

अगर किसी कारण से सरसों की बुवाई में देरी हो जाए, तो बीपीएम 11 के बारे में जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है। यह किस्म देर से बुवाई वाली सिंचित परिस्थितियों के लिए अनुशंसित है। इसकी औसत बीज उपज करीब 18.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और पकने की अवधि लगभग 123 दिन बताई गई है।

 

ध्यान रखें: ये उपज के आंकड़े निर्धारित परिस्थितियों में दर्ज औसत हैं। खेत में वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई और फसल की देखभाल के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।

 

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए 6 जरूरी बातें

 

·        सही समय पर बुवाई करें। अपने क्षेत्र और किस्म के अनुसार बुवाई का समय चुनें। बहुत देर से बुवाई करने पर फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

 

·        प्रमाणित बीज खरीदें। बीज के पैकेट पर किस्म का नाम, अंकुरण क्षमता और दूसरी जरूरी जानकारी जांच लें।

 

·        खेत की तैयारी अच्छी रखें। मिट्टी भुरभुरी हो और पानी निकासी की व्यवस्था ठीक होनी चाहिए।

 

·        खाद संतुलित मात्रा में दें। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करें। जरूरत से ज्यादा खाद डालने से अधिक पैदावार की गारंटी नहीं मिलती।

 

·        पानी का सही प्रबंधन करें। सरसों कम सिंचाई में उगाई जा सकती है, लेकिन फसल की जरूरत के अनुसार नमी मिलना जरूरी है। फूल आने और दाना भरने के समय पानी की कमी उत्पादन पर असर डाल सकती है।

 

 

·        खरपतवार और कीटों पर नजर रखें। खेत की नियमित निगरानी करें। किसी समस्या के लक्षण दिखने पर सही पहचान कराकर ही उसका उपचार करें।

 

क्या कम पानी में सरसों की खेती फायदेमंद है?

सरसों कई क्षेत्रों में कम सिंचाई वाली रबी फसल के रूप में उगाई जाती है। लेकिन कम पानी की जरूरत का मतलब यह नहीं है कि फसल बिना नमी के अच्छी पैदावार देगी।

 

अगर आपके खेत में सिंचाई की सुविधा कम है, तो ऐसी किस्म चुनें जो आपके क्षेत्र में वर्षा आधारित या कम सिंचाई वाली खेती के लिए अनुशंसित हो। खेत में उपलब्ध नमी का सही इस्तेमाल करें और बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।

 

सरसों की खेती से कमाई किन बातों पर निर्भर करती है?

सरसों से होने वाली कमाई सिर्फ पैदावार पर निर्भर नहीं करती। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, कटाई और ढुलाई का खर्च भी जोड़ना जरूरी है। इसके साथ ही फसल बेचते समय मिलने वाला बाजार भाव भी मुनाफे को प्रभावित करता है।

 

इसलिए किसान बुवाई से पहले अनुमानित खर्च और संभावित आमदनी का हिसाब बना लें। किसी किस्म की ज्यादा उपज के आंकड़े को अपने खेत में मिलने वाली निश्चित पैदावार न मानें।

 

किसानों के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

 

सरसों की खेती के लिए कौन-सी किस्म अच्छी है?

यह आपके क्षेत्र, बुवाई के समय और सिंचाई की उपलब्धता पर निर्भर करता है। पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-31, बीपीएम 1825, बीपीएम (क्यू) 172 और बीपीएम 11 अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अनुशंसित किस्मों में शामिल हैं।

 

सरसों की बुवाई कब करनी चाहिए?

सरसों की बुवाई का सही समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार बदलता है। उत्तर भारतीय मैदानी इलाकों में अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा कई किस्मों के लिए उपयुक्त रहता है, लेकिन स्थानीय कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।

 

क्या सरसों की खेती कम पानी में की जा सकती है?

हां, कुछ किस्में वर्षा आधारित खेती के लिए उपयुक्त होती हैं। लेकिन पैदावार मिट्टी की नमी, मौसम और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

 

क्या उन्नत किस्म लगाने से ज्यादा कमाई निश्चित है?

नहीं। अच्छी किस्म बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ा सकती है, लेकिन वास्तविक कमाई उपज, बाजार भाव और खेती की कुल लागत पर निर्भर करती है।

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