पराली जलाने की बजाय इन 5 तरीकों से करें इस्तेमाल, खेत की सेहत सुधरेगी और कमाई का मौका भी मिलेगा

पराली जलाने की बजाय इन 5 तरीकों से करें इस्तेमाल, खेत की सेहत सुधरेगी और कमाई का मौका भी मिलेगा
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Kisaan Helpline

Agriculture
Oct 15, 2026

धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को जलाने की जरूरत नहीं है। किसान भाई इससे जैविक खाद बना सकते हैं, मशरूम की खेती में इस्तेमाल कर सकते हैं और बायोमास ईंधन बनाने वाली कंपनियों को बेच भी सकते हैं। जानिए पराली प्रबंधन के आसान तरीके, उनके फायदे और पराली से कमाई करने के विकल्प।

 

धान की कटाई के बाद खेत में पराली बचना आम बात है। कई किसान सोचते हैं कि इसे जल्दी हटाया जाए, ताकि अगली फसल की बुवाई समय पर हो सके। इसी जल्दबाजी में कुछ किसान पराली जला देते हैं। लेकिन इससे खेत में आग लगाने के साथ धुआं फैलता है और मिट्टी को भी नुकसान पहुंच सकता है।

 

क्या आप जानते हैं कि खेत में बची यही पराली आपके काम आ सकती है? सही तरीके से इस्तेमाल करने पर इससे खाद बनाई जा सकती है, मशरूम उगाए जा सकते हैं और कुछ जगहों पर इसे बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है।

 

अगर आप भी पराली जलाने का विकल्प तलाश रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि पराली का उपयोग कैसे करें और अपने खेत के हिसाब से सही तरीका कैसे चुनें।

 

पराली का सही इस्तेमाल करने के 5 आसान तरीके

 

1. पराली बेचकर कमाई का मौका तलाशें

 

धान और गेहूं की पराली में ऊर्जा होती है। इसका इस्तेमाल बायोमास ईंधन बनाने में किया जाता है। इसके लिए पराली को इकट्ठा करके मशीनों की मदद से छोटे टुकड़ों या दबे हुए ठोस रूप में तैयार किया जाता है। इससे पेलेट्स और ब्रिकेट्स जैसे ईंधन बनाए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ उद्योगों में होता है।

 

अगर आपके आसपास पराली खरीदने वाली कंपनी, बायोमास संयंत्र या संग्रह केंद्र है, तो आप वहां अपनी पराली बेचने की जानकारी ले सकते हैं।

 

हालांकि, पराली बेचने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें। पता करें कि खरीदार किस तरह की पराली लेता है, कितनी मात्रा में खरीदता है और क्या उसे खेत से उठाने की सुविधा देता है। परिवहन और कटाई का खर्च निकालने के बाद ही हिसाब लगाएं कि आपको कितना फायदा हो सकता है।

 

2. पराली से जैविक खाद बनाकर खेत में डालें

 

पराली का इस्तेमाल करने का एक अच्छा तरीका उससे खाद बनाना है। इसे जलाने के बजाय छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में मिलाया जा सकता है या उचित नमी और सड़ने की प्रक्रिया के जरिए कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है।

 

इससे फसल के बचे हुए जैविक पदार्थ खेत में वापस पहुंचते हैं। नियमित रूप से सही तरीके से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से मिट्टी की संरचना और नमी बनाए रखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

 

इस तरीके का एक फायदा यह भी है कि किसान को हर बार पराली बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन ध्यान रखें कि पराली को सड़ने में समय लगता है। इसलिए अगली फसल की बुवाई कब करनी है, इसे ध्यान में रखकर खाद बनाने या खेत में अवशेष मिलाने की योजना बनाएं।

 

3. मशरूम की खेती में करें पराली का इस्तेमाल

 

अगर आप खेती के साथ कोई दूसरा काम शुरू करना चाहते हैं, तो मशरूम उत्पादन भी एक विकल्प हो सकता है। धान की पराली का इस्तेमाल कुछ प्रकार के मशरूम उगाने के लिए किया जाता है।

 

इसके लिए पराली को साफ करके और उचित तरीके से उपचारित करके तैयार किया जाता है। इसके बाद इसका इस्तेमाल मशरूम उगाने के माध्यम के रूप में किया जा सकता है।

 

किसान भाई मशरूम की खेती शुरू करने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण ले सकते हैं। साथ ही, स्थानीय बाजार में मशरूम की मांग, उत्पादन खर्च और बिक्री की व्यवस्था के बारे में जानकारी जरूर जुटाएं।

 

इस तरह खेत में बची पराली का उपयोग दूसरी कृषि गतिविधि में किया जा सकता है। हालांकि, मशरूम की खेती से होने वाला लाभ उत्पादन, लागत और बाजार पर निर्भर करेगा।

 

4. पराली से बनते हैं पैकेजिंग सामग्री और बोर्ड

 

पराली का इस्तेमाल केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कुछ प्रसंस्करण इकाइयां इससे रेशे वाले उत्पाद, बोर्ड और पैकेजिंग सामग्री तैयार करती हैं।

 

इन कामों के लिए पराली कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। अगर आपके इलाके में ऐसी इकाइयां हैं, तो किसान समूह या किसान उत्पादक संगठन मिलकर उनसे संपर्क कर सकते हैं।

 

इससे पराली को बेकार समझकर फेंकने या जलाने के बजाय उपयोग में लाने का रास्ता मिल सकता है। हालांकि, हर जगह ऐसी इकाइयां उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए पहले खरीदार और उसकी शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।

 

5. कृषि मशीनों की मदद से खेत में ही करें पराली प्रबंधन

 

कई किसान इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि पराली हटाए बिना अगली फसल की बुवाई कैसे करें। ऐसे में कृषि मशीनें मददगार हो सकती हैं।

 

पराली प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रमुख मशीनें इस प्रकार हैं:

 

हैप्पी सीडर: खेत में मौजूद फसल अवशेषों के बीच गेहूं की बुवाई करने में मदद करती है।

 

सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस): कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के दौरान निकलने वाले भूसे को खेत में फैलाने में मदद करता है।

 

मल्चर: पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने के काम आता है।

 

स्ट्रॉ रीपर: खेत में बचे भूसे को इकट्ठा करके उपयोगी रूप में तैयार करने में मदद करता है।

 

इन मशीनों का चुनाव अपनी फसल, खेत की स्थिति और अगली बुवाई की जरूरत के अनुसार करें। अगर मशीन खरीदना महंगा पड़ता है, तो नजदीकी कस्टम हायरिंग सेंटर से किराये पर मशीन लेने की जानकारी जुटाएं।

 

इससे छोटे और सीमांत किसानों को मशीन खरीदने पर बड़ी रकम खर्च करने से बचने में मदद मिल सकती है।

 

पराली जलाने से खेत और पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?

 

पराली जलाने पर निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है। इससे आसपास के लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और वायु गुणवत्ता भी खराब हो सकती है।

 

इसके अलावा, आग की तेज गर्मी मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद कुछ उपयोगी जीवों को नुकसान पहुंचा सकती है। फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थ और कुछ पोषक तत्व भी प्रभावित हो सकते हैं।

 

इसीलिए पराली जलाने के बजाय उसका सही प्रबंधन करना ज्यादा उपयोगी विकल्प है। इससे खेत के अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है।

 

पराली से कमाई करने से पहले किसान इन 5 बातों का रखें ध्यान

 

अगर आप पराली बेचने या उससे कोई दूसरा काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाजी में फैसला न लें।

 

खरीदार की जानकारी लें: पता करें कि आपके इलाके में पराली खरीदने वाली कंपनी या संग्रह केंद्र उपलब्ध है या नहीं।

 

पूरी लागत जोड़ें: कटाई, गांठ बनाने, लोडिंग और परिवहन का खर्च भी हिसाब में शामिल करें।

 

मशीन की उपलब्धता देखें: मशीन खरीदने से पहले किराये या सरकारी सहायता की जानकारी लें।

 

अगली फसल की तैयारी करें: पराली प्रबंधन ऐसा रखें कि अगली फसल की बुवाई में देरी न हो।

 

कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें: अपने खेत और मिट्टी के अनुसार सही तरीका जानने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें।

 

ध्यान रखें कि पराली से होने वाली कमाई हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होगी। यह स्थानीय बाजार, पराली की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और ढुलाई के खर्च पर निर्भर करती है।

 

किसानों के लिए अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

 

1. पराली का इस्तेमाल किन-किन कामों में किया जा सकता है?

 

पराली से जैविक खाद बनाई जा सकती है। इसका इस्तेमाल बायोमास ईंधन, मशरूम उत्पादन, कुछ बोर्ड और पैकेजिंग सामग्री बनाने में भी होता है।

 

2. क्या पराली बेचकर किसान कमाई कर सकते हैं?

 

हां, जहां पराली खरीदने वाली कंपनियां, बायोमास संयंत्र या संग्रह केंद्र उपलब्ध हैं, वहां किसान पराली बेचने की संभावना तलाश सकते हैं।

 

3. क्या पराली से जैविक खाद बनाई जा सकती है?

 

हां, पराली को छोटे टुकड़ों में काटकर और उचित नमी तथा सड़ने की प्रक्रिया के जरिए कंपोस्ट खाद बनाई जा सकती है।

 

4. पराली प्रबंधन के लिए कौन-सी मशीनें उपयोगी हैं?

 

हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर और स्ट्रॉ रीपर जैसी मशीनें पराली के प्रबंधन में मदद करती हैं। मशीन का चुनाव खेत की स्थिति और अगली फसल की जरूरत के अनुसार करना चाहिए।

 

5. पराली प्रबंधन के लिए किसान कहां संपर्क करें?

 

किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग, किसान उत्पादक संगठन या कस्टम हायरिंग सेंटर से संपर्क कर सकते हैं।

 

पराली को बोझ नहीं, संसाधन समझें

 

किसान भाइयों, धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को जलाना ही उसका एकमात्र समाधान नहीं है। आप अपने खेत की जरूरत के अनुसार उससे खाद बना सकते हैं, मशीनों की मदद से अगली फसल की बुवाई कर सकते हैं या स्थानीय खरीदार मिलने पर उसे बेचने का विकल्प चुन सकते हैं।

 

पराली प्रबंधन का सबसे अच्छा तरीका वही है, जो आपके खेत के लिए उपयोगी हो और खर्च के हिसाब से किफायती पड़े। इसलिए पराली जलाने से पहले उसके सही इस्तेमाल की जानकारी जरूर लें। इससे खेत की सेहत बनाए रखने और अतिरिक्त आमदनी के अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

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