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लहसुन के कंद छोटे रहने की वजह कमजोर कलियां, देर से बुवाई, कम दूरी, खाद का असंतुलन, सिंचाई में गड़बड़ी और खरपतवार या कीटों का असर हो सकता है। बेहतर कंदों के लिए किसान स्वस्थ कलियां चुनें, समय पर बुवाई करें, उचित दूरी रखें और मिट्टी व मौसम के अनुसार खाद-पानी का प्रबंधन करें।
लहसुन की खेती: किसान भाई, अगर लहसुन की पत्तियां तो अच्छी तरह बढ़ रही हैं, लेकिन कंद छोटे रह जाते हैं, तो इसकी वजह पर ध्यान देना जरूरी है। कई बार किसान पूरी मेहनत करते हैं, समय पर सिंचाई भी करते हैं, फिर भी लहसुन का आकार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ता।
ऐसा होने के पीछे कमजोर कलियां, देर से बुवाई, पौधों के बीच कम दूरी, खाद का असंतुलित इस्तेमाल, सिंचाई में लापरवाही और खरपतवार या कीटों का प्रकोप जैसे कारण हो सकते हैं। इसके अलावा लहसुन की किस्म, मिट्टी और मौसम का भी कंदों के आकार पर असर पड़ता है।
अगर आप भी लहसुन की खेती करते हैं, तो इन 6 बातों को समझ लें। इससे फसल की सही देखभाल करने और छोटे कंदों की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
1. बुवाई के लिए छोटी और कमजोर कलियां चुनना
लहसुन की फसल में अच्छी शुरुआत के लिए स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाली कलियां चुनना जरूरी है। बहुत छोटी, सूखी, सिकुड़ी हुई या रोग लगी कलियों से पौधों की शुरुआती बढ़वार कमजोर हो सकती है। इसका असर आगे चलकर कंद के विकास पर भी पड़ सकता है।
किसान क्या करें?
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बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त कलियां चुनें।
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बहुत छोटी, सूखी या खराब कलियों को अलग कर दें।
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अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म का चुनाव करें।
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बीज के लिए ऐसे लहसुन का इस्तेमाल करें जिसकी गुणवत्ता अच्छी हो।
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ध्यान रखें कि केवल बड़ी कली चुनना ही काफी नहीं है। किस्म और खेत की स्थिति भी कंद के आकार को प्रभावित करती है।
2. लहसुन की बुवाई में देरी करना
लहसुन की बुवाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार बदलता है। कई मैदानी इलाकों में अक्टूबर से नवंबर के बीच इसकी बुवाई की जाती है, लेकिन हर जगह यही समय लागू नहीं होता।
अगर बुवाई में ज्यादा देरी हो जाए, तो पौधों को बढ़ने और कंद तैयार करने के लिए अनुकूल मौसम कम मिल सकता है। इससे कंदों का आकार और उपज प्रभावित होने की आशंका रहती है।
किसान क्या करें?
अपने इलाके के मौसम और चुनी गई किस्म के अनुसार बुवाई का समय तय करें। अगर आप मध्य प्रदेश, राजस्थान या किसी दूसरे राज्य में लहसुन उगा रहे हैं, तो स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह जरूर लें।
3. पौधों के बीच कम दूरी रखना
कई किसान ज्यादा पौधे लगाने के लिए लहसुन की कलियां पास-पास लगा देते हैं। इससे पौधों के बीच जगह, पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। नतीजतन कंदों के विकास पर असर पड़ सकता है।
किसान क्या करें?
लहसुन की किस्म और खेती की विधि के अनुसार उचित दूरी रखें। सामान्य तौर पर कई खेती प्रणालियों में कतार से कतार करीब 15 सेंटीमीटर
और पौधे से पौधे करीब 10 सेंटीमीटर
दूरी रखी जाती है। छोटी या बड़ी कलियों वाली किस्मों में दूरी अलग हो सकती है।
बुवाई करते समय पौधों को पर्याप्त जगह दें, ताकि उनकी बढ़वार ठीक से हो सके।
4. खाद का जरूरत से ज्यादा या कम इस्तेमाल करना
लहसुन के कंदों का अच्छा विकास तभी होता है, जब पौधों को जरूरी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलें। पोषक तत्वों की कमी से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पत्तियों की बढ़वार तो अधिक हो सकती है, लेकिन इससे कंद बड़े होने की गारंटी नहीं मिलती।
किसान क्या करें?
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बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं।
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खेत की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक डालें।
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अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद का इस्तेमाल करें।
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नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा बिना सलाह के न बढ़ाएं।
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लहसुन में संतुलित पोषण के लिए जैविक खाद और जरूरी उर्वरकों का उचित मेल उपयोगी हो सकता है।
5. सिंचाई में लापरवाही करना
लहसुन की जड़ें मिट्टी की ऊपरी परत में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। इसलिए फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलना जरूरी है। खासकर कंद बनने और उनके आकार बढ़ने के समय पानी की कमी होने पर विकास प्रभावित हो सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खेत में लगातार पानी भरकर रखें। अधिक पानी या जलभराव से जड़ों और कंदों में सड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फसल पकने के समय लगातार सिंचाई करने से भी नुकसान हो सकता है।
किसान क्या करें?
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मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई करें।
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हल्की मिट्टी और भारी मिट्टी में पानी की जरूरत अलग हो सकती है।
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खेत में पानी जमा न होने दें।
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फसल पकने के करीब सिंचाई बंद करने का समय स्थानीय सलाह के अनुसार तय करें।
याद रखें, लहसुन में कम पानी और जरूरत से ज्यादा पानी, दोनों ही नुकसान पहुंचा सकते हैं।
6. खरपतवार और कीटों पर ध्यान न देना
लहसुन के खेत में खरपतवार बढ़ने से फसल को पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। वहीं थ्रिप्स जैसे कीट पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पत्तियां कमजोर होने पर पौधे की बढ़वार और कंदों का विकास भी प्रभावित हो सकता है।
किसान क्या करें?
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खेत की नियमित निगरानी करें।
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समय पर खरपतवार निकालें।
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पत्तियों पर धब्बे, सूखने या कीटों के लक्षण दिखें तो उनकी पहचान कराएं।
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जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का इस्तेमाल करें।
बिना कीट या रोग की पहचान किए दवा का छिड़काव न करें। इससे खर्च बढ़ सकता है और फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।
लहसुन के कंद बड़े करने के लिए किसान क्या ध्यान रखें?
स्वस्थ कलियों का चुनाव करें
बुवाई के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली और रोगमुक्त कलियां इस्तेमाल करें।
सही समय पर बुवाई करें
अपने क्षेत्र और किस्म के अनुसार बुवाई का समय चुनें।
संतुलित खाद और सिंचाई रखें
मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषण दें और नमी का संतुलन बनाए रखें।
खरपतवार और कीटों पर नजर रखें
समय-समय पर खेत देखें और समस्या दिखने पर सही उपाय अपनाएं।
किसानों के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लहसुन के कंद छोटे क्यों रह जाते हैं?
कमजोर कलियां, देर से बुवाई, पौधों के बीच कम दूरी, पोषक तत्वों की कमी या असंतुलन, सिंचाई में गड़बड़ी और खरपतवार इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। किस्म और मौसम का भी असर पड़ता है।
लहसुन की बुवाई कब करनी चाहिए?
लहसुन की बुवाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार तय होता है। कई मैदानी इलाकों में अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई की जाती है। स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार सही समय चुनें।
लहसुन में कितनी दूरी रखनी चाहिए?
कई सामान्य खेती प्रणालियों में कतार से कतार करीब 15 सेंटीमीटर
और पौधे से पौधे करीब 10 सेंटीमीटर
दूरी रखी जाती है। सही दूरी किस्म और कलियों के आकार पर निर्भर करती है।
क्या ज्यादा खाद डालने से लहसुन के कंद बड़े होते हैं?
नहीं। जरूरत से ज्यादा खाद देने से बड़े कंद मिलने की गारंटी नहीं होती। मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित खाद देना बेहतर रहता है।
लहसुन की फसल में सिंचाई कितने दिन के अंतर पर करें?
सिंचाई का अंतर मिट्टी, मौसम और फसल की अवस्था के अनुसार बदलता है। लहसुन में नमी की कमी न होने दें, लेकिन खेत में पानी भी जमा न रहने दें।
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