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ड्रैगन फ्रूट की खेती से बढ़ रही किसानों की कमाई, नई बागवानी फसल बन रही किसानों की पहली पसंद
भारत में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है। अब किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और मक्का के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं में से एक फसल है ड्रैगन फ्रूट, जो आज किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती के रूप में उभर रही है। कई राज्यों में किसान इस विदेशी फल की खेती कर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं और नई कृषि क्रांति की शुरुआत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है और इसकी खेती से किसानों की आय में अच्छा इजाफा हो सकता है। यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में किसान पारंपरिक खेती छोड़कर ड्रैगन फ्रूट की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ड्रैगन फ्रूट क्या है और क्यों बढ़ रही इसकी मांग
ड्रैगन फ्रूट एक विदेशी फल है, जिसे पिटाया (Pitaya) भी कहा जाता है। यह फल मूल रूप से दक्षिण अमेरिका का माना जाता है, लेकिन अब भारत में भी इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है।
इस फल की खासियत यह है कि इसमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और कई तरह के विटामिन पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसी कारण देश और विदेश में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
बढ़ती मांग के कारण बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।
कम पानी में भी हो सकती है खेती
ड्रैगन फ्रूट की खेती की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। इसलिए यह फसल उन क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त है जहां पानी की कमी रहती है।
यह पौधा कैक्टस परिवार का होता है, इसलिए सूखे क्षेत्रों में भी आसानी से उग सकता है। इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली मिट्टी और गर्म जलवायु उपयुक्त मानी जाती है।
यही कारण है कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भी किसान इसकी खेती शुरू कर रहे हैं।
एक बार लगाएं, कई साल तक कमाई
ड्रैगन फ्रूट की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद 20–25 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है।
इसकी फसल रोपण के लगभग 16–20 महीने बाद फल देना शुरू कर देती है और तीसरे साल तक पहुंचते-पहुंचते इसका उत्पादन काफी बढ़ जाता है।
इसके बाद किसान कई वर्षों तक लगातार इस फसल से कमाई कर सकते हैं।
प्रति एकड़ कितनी हो सकती है कमाई
ड्रैगन फ्रूट की खेती में शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा होती है, क्योंकि इसमें पोल सिस्टम और पौध लगाने की जरूरत होती है। लेकिन एक बार बाग तैयार होने के बाद इससे अच्छी आमदनी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार
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एक एकड़ में लगभग 10 से 15 टन तक उत्पादन हो सकता है।
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बाजार में ड्रैगन फ्रूट की कीमत लगभग ₹100 से ₹300 प्रति किलो तक मिल जाती है।
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सही प्रबंधन और मार्केटिंग के साथ किसान ₹3 से ₹5 लाख प्रति एकड़ तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।
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कुछ सफल किसानों ने तो इससे भी ज्यादा कमाई की है।
सफल किसानों की कहानी बनी प्रेरणा
देश के कई राज्यों में किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती से नई पहचान बना रहे हैं। पंजाब के एक किसान ने पहले केवल 0.25 एकड़ में इसकी खेती शुरू की थी, लेकिन अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने इसे बढ़ाकर 4 एकड़ तक कर दिया। आज उन्हें प्रति एकड़ लगभग 30 क्विंटल उत्पादन मिल रहा है और बाजार में यह फल करीब ₹150 प्रति किलो तक बिक रहा है।
इसी तरह महाराष्ट्र के एक किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती कर प्रति एकड़ लगभग ₹10 लाख तक की कमाई की और सूखे क्षेत्र में भी खेती को लाभदायक बना दिया।
इन उदाहरणों से प्रेरित होकर कई अन्य किसान भी अब इस खेती को अपनाने लगे हैं।
सरकार भी दे रही बढ़ावा
भारत में बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई योजनाएं चला रही है। ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को पौधे, तकनीकी सलाह और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
कई राज्यों में कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को इस खेती के बारे में प्रशिक्षण देकर उन्हें नई तकनीकों से जोड़ रहे हैं।
ड्रैगन फ्रूट की खेती के फायदे
ड्रैगन फ्रूट की खेती के कई फायदे हैं, जैसे:
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कम पानी में भी अच्छी पैदावार
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लंबे समय तक उत्पादन
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बाजार में अच्छी कीमत
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कम कीट और रोग
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निर्यात की अच्छी संभावना
इन सभी कारणों से यह फसल किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनती जा रही है।
किसानों के लिए क्या है सलाह
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें और अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे ही लगाएं। इसके अलावा सही प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, ताकि उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकें।
ड्रैगन फ्रूट की खेती आज भारत में किसानों के लिए आय बढ़ाने का नया जरिया बन रही है। कम पानी में अधिक उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण यह फसल तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यदि किसान आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन के साथ इसकी खेती करें तो आने वाले समय में यह खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।