अब तोरई में भी बासमती जैसी खुशबू! कृषि वैज्ञानिकों की अनोखी खोज, किसानों के लिए खुशखबरी

अब तोरई में भी बासमती जैसी खुशबू! कृषि वैज्ञानिकों की अनोखी खोज, किसानों के लिए खुशखबरी
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Crops Jan 08, 2026

अब तोरई में भी बासमती जैसी खुशबू! कृषि वैज्ञानिकों की अनोखी खोज, किसानों के लिए खुशखबरी

 

अब तक बासमती चावल अपनी खास खुशबू के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यही खुशबू सब्जियों में भी मिलने वाली है। देश के जाने-माने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी के कृषि वैज्ञानिकों ने तोरई की एक ऐसी नई किस्म विकसित की है, जिसमें बासमती चावल जैसी प्राकृतिक खुशबू आती है। यह खोज करीब 8 साल की लगातार मेहनत के बाद संभव हो पाई है।

 

क्या है इस नई तोरई की खास बात?

 

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह तोरई पूरी तरह प्राकृतिक है। इसमें किसी तरह की मिलावट या कृत्रिम खुशबू नहीं डाली गई है। जब यह तोरई पकाई जाती है या उबाली जाती है, तो रसोई में बासमती चावल जैसी खुशबू फैल जाती है। यही वजह है कि यह किस्म बाजार में भी अलग पहचान बना सकती है।

 

इस नई किस्म का रंग हल्का हरा (लाइट ग्रीन) है, जिसे उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में पहले से ही पसंद किया जाता है। खासतौर पर बस्ती और गोरखपुर मंडल से जुड़े इलाकों में इस रंग की तोरई की मांग ज्यादा रहती है।

 

वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

 

IIVR के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, यह तोरई अब तक की सबसे अनोखी किस्मों में से एक है। वहीं, इस प्रजाति को विकसित करने वाले प्रधान वैज्ञानिक डॉ. त्रिभुवन चौबे ने बताया कि इस किस्म को नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, नई दिल्ली में पंजीकृत किया जा चुका है।

इसका नाम वीआरएसजी 7-17 (VRSG 7-17) रखा गया है।

 

किसानों को कैसे होगा फायदा?

·       बासमती जैसी खुशबू के कारण बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना

·       उपभोक्ताओं की पसंद बढ़ेगी

·       सब्जी मंडियों और लोकल मार्केट में अलग पहचान

 

कम समय में तैयार होने वाली फसल

संस्थान अब इस किस्म के बीज बड़े पैमाने पर तैयार कर रहा है। जल्द ही किसानों को यह बीज खेती के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

 

फसल की अवधि और उत्पादन क्षमता

·       फसल तैयार होने का समय: 55 से 60 दिन

·       औसत फल लंबाई: 27.46 सेमी

·       फल का डायमीटर: 3.35 सेमी

·       औसत वजन: लगभग 156 ग्राम

·       प्रति पौधा औसत उत्पादन: 1.13 किलो

·       खास बात यह है कि पकाने के बाद भी इसकी खुशबू बनी रहती है।

 

किसानों के लिए कृषि सलाह (Krishi Advisory)

 

1. मिट्टी का चयन

तोरई की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। खेत में पानी भरने की समस्या नहीं होनी चाहिए।

 

2. खेत की तैयारी

·       3–4 बार गहरी जुताई करें

·       अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट जरूर मिलाएं

·       इसके बाद बेड बनाकर बुवाई करें

 

3. बेड और दूरी

·       बेड से बेड की दूरी: 5–7 फीट

·       बेड की ऊंचाई: 1–1.5 फीट

·       इससे पानी नहीं रुकता और जड़ें स्वस्थ रहती हैं।

 

4. मचान विधि अपनाएं

मचान या सहारा देने से:

·       बेलें अच्छी तरह फैलती हैं

·       कीट-रोग कम लगते हैं

·       फल साफ और एकसार मिलते हैं

·       पैदावार बढ़ती है

 

5. फसल का मौसम

तोरई की यह नई किस्म खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है।

 

बासमती जैसी खुशबू वाली तोरई किसानों के लिए एक नया मौका लेकर आई है। कम समय में तैयार होने वाली, अच्छी उपज देने वाली और बाजार में अलग पहचान बनाने वाली यह किस्म आने वाले समय में सब्जी खेती की तस्वीर बदल सकती है। जैसे ही इसके बीज उपलब्ध हों, किसान इसे अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

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