रबी फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि नजदीक, किसान जल्द करें आवेदन

रबी फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि नजदीक, किसान जल्द करें आवेदन
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Kisaan Helpline

Agriculture Dec 30, 2025

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 31 दिसंबर तक रबी 2025-26 की फसलों का बीमा अनिवार्य


रबी मौसम में फसल उगाने वाले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रबी 2025-26 की फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं।


जिन किसानों ने केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से बैंक से ऋण लिया है, उनका फसल बीमा सामान्यतः बैंक द्वारा किया जाता है। लेकिन यदि किसी कारणवश बैंक से बीमा नहीं हुआ है, तो ऐसे किसान तुरंत अपनी बैंक शाखा से संपर्क कर बीमा सुनिश्चित करें।


वहीं, जिन किसानों की केसीसी समय पर न चुकाने के कारण डिफॉल्टर हो गई है, वे भी अऋणी किसान की श्रेणी में फसल बीमा करा सकते हैं। इसके अलावा वे किसान जो अब तक किसी कारण से फसल बीमा से वंचित रह गए हैं, उन्हें अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना नजदीकी सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, जन सेवा केंद्र (CSC) या MP Online के माध्यम से बीमा कराने की सलाह दी गई है।


फसल बीमा के लिए जरूरी दस्तावेज:


फसल बीमा कराने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज साथ ले जाने होंगे, जिनमें –


एग्रीटेक किसान आईडी (अनिवार्य)


आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए)


भू-अधिकार पुस्तिका / ऋणी पुस्तिका


बैंक पासबुक या बैंक विवरण


बुवाई प्रमाण पत्र (स्वप्रमाणित या पटवारी/पंचायत सचिव से जारी)


बटाई पर खेती करने की स्थिति में शपथ पत्र


रबी मौसम की अधिसूचित फसलें:


राज्य और उप-जिला स्तर पर रबी मौसम के लिए जिन फसलों को बीमा योजना में शामिल किया गया है, उनमें सिंचित गेहूं, असिंचित गेहूं, चना, सरसों, अलसी और मसूर प्रमुख हैं।


इन फसलों के लिए किसान बीमित राशि का केवल 1.5 प्रतिशत प्रीमियम प्रति हेक्टेयर जमा कर फसल बीमा करा सकते हैं।


किसानों को सलाह:


कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं, ताकि अप्रत्याशित मौसम, प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल सके और किसानों को नुकसान की भरपाई हो सके।

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