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फूल तथा फल अगस्त-सितंबर में और फल फरवरी से मार्च तक पकते हैं, जानिए बेर के वृक्ष की विशेषता
फूल तथा फल अगस्त-सितंबर में और फल फरवरी से मार्च तक पकते हैं, जानिए बेर के वृक्ष की विशेषता

Plum Farming: बेर के पौधे में कुछ ऐसे गुण हैं, जिसके कारण यह शुष्क क्षेत्रों में खेती के लिए बहुत ही सफल फलदार वृक्ष है। इन्हीं गुणों के कारण इसे बारानी का बादशाह कहा जाता है। इसकी जड़ मूसलादार होती है, जो मृदा की कठोर सतह को तोड़कर काफी गहराई तक पहुंचकर निचली सतह से जल शोषित कर पौधे को स्वस्थ रखती हैं। अन्य फल वृक्षों की तुलना में इसके पौधों को बहुत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। गर्मी के मौसम में जब अन्य फल वृक्षों को सिंचाई की आवश्यकता होती है उस समय इसकी पत्तियां झड़ जाती हैं। पौधा एक प्रकार से प्रसुप्तावस्था में आ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसमें फूल तथा फल वर्षा ऋतु के बाद अगस्त-सितंबर में आते हैं। फल फरवरी से मार्च तक पकते हैं। इन्हीं गुणों के कारण बेर की बागवानी शुष्क तथा अर्धशुष्क क्षेत्रों के लिए लाभदायक सिद्ध हो रही है। बेर की खेती ऊष्ण व उपोष्ण जलवायु में आसानी से की जा सकती है, क्योंकि इसमें कम पानी व सूखे से लड़ने की विशेष क्षमता होती है। शीत ऋतु में पड़ने वाले पाले के प्रति यह अति संवेदनशील होता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में जहां नियमित रूप से पाला पड़ने की आशंका रहती है, इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।