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जैविक खेती में हानिकारक कीटों के नियंत्रण हेतु जैविक विकल्प
जैविक खेती में हानिकारक कीटों के नियंत्रण हेतु जैविक विकल्प

मित्र कीटों का प्रयोगः जैविक नियंत्रण वह प्रक्रिया है, जिसमें कुछ लाभदायक जीवों (रोगनाशकों) द्वारा हानिकारक एवं रोगकारक जीवों का आंशिक अथवा पूर्णरूपेण विनाश किया जाता है। इसमें रसायनों का प्रयोग नहीं होता है। रोगकारकों का विनाश करने वाले जीव रोग नियंत्रक कहलाते हैं। 'जीवः जीवस्य भोजनम' के सिद्धांत पर प्रकृति भी कीट नियंत्रण करती है। ऐसे प्राकृतिक जीव एवं कीट जो फसलों के हानिकारक कीटों को नष्ट करते हैं, 'मित्र जीव' अथवा मित्र कीट के नाम से जाने जाते हैं। अनेक पक्षी जैसे-बटेर, तीतर, कौआ, मैना, उल्लू, कोकिल, टिटहरी आदि कीट खाते हैं। जुताई करते समय हल के पीछे कुछ पक्षी चलते रहते जो खुली मृदा से कई प्रकार की लटों एवं कीटों को खाते हैं। वर्तमान समय में कीट एवं रोगों का नियंत्रण करने के लिए ट्राइकोडर्मा, बिवेरिया बैसियाना, ट्राइकोग्रामा क्राइसोपरला इत्यादि का प्रयोग भी काफी प्रचलन में है। 

लेडी बर्ड बीटल एवं क्राइसोपरला (50,000 लार्वा / हैक्टर) लट, वयस्क हरा तैला, मोयला, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माइट्स आदि कीटों के अंडे व प्रथम अवस्था को खाकर जीवित रहते हैं।

ट्राइकोडर्मा : यह पौधों के जड़ विन्यास क्षेत्र ( राइजोस्फियर) में खामोशी से अनवरत कार्य करने वाला सूक्ष्म कवक है, जो प्रायः मृदा में सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों के ऊपर तीव्र गति से वृद्धि करता है। यह फफूंद अन्य रोग उत्पन्न करने वाले मृदाजनित फफूंदों को बढ़ने से रोकता है एवं उनका विनाश करता है। इसीलिये इसको मित्र फफूंदनाशी भी कहा गया है।

बिवेरिया बैसियानाः यह एक जैविक कीटनाशी फफूंद है, जो कि मृदा में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह एक परजीवी के रूप में विभिन्न प्रकार के कीटों के ऊपर संक्रमण करके वृद्धि करके मारता है। विभिन्न कीटों जैसे-सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माहू, चैंपा, दीमक, डायमंड बैक मोथ, सफेद लट, मिलीबग इत्यादि के नियंत्रण में इसका प्रयोग किया जाता है।

ट्राइकोग्रामाः यह एक मित्र कीट हैं, जो लेपिडोप्टेरा समूह (लट वाले) के हानिकारक कीटों के अंडों पर अपने अंडे देकर उन्हें नष्ट कर देता है। एनपीवी: यह दो प्रकार का होता है एनपीवी (एच) जो फसलों की अमेरिकन सूंडी (हेलियोथिरा) व एनपीवी (एस) जो स्पोडोप्टेरा गण के कीटों को मारने के काम आता है। इसमें वायरस के कण होते हैं, जिनको सूंडी द्वारा खाने से सूंडियों की मृत्यु हो जाती है।

जैविक कीटनाशकों का प्रयोग 
ऐसा कीटनाशक जो जीवित पदार्थों से बनाया गया हो एवं जिसका प्रभाव मानव जीवन पर उपयोगी हो जैसे- नीमास्त्र, ब्रहमास्त्र, गोमूत्र, दशपर्णी सत्त, लहसुन का घोल, लाल मिर्च इत्यादि

नीम का तेल, नीम की खली, नीम की पत्तियों का रस एवं नीम के तेल में उपस्थित अजाडिरेक्टिन बहुत प्रभावी कीटनाशक का काम करते हैं। ये सभी प्रकार के कीटों का नियंत्रण करने में सक्षम हैं। गोमूत्र ( 4-5 प्रतिशत) का घोल खट्टी छाछ का छिड़काव भी अनेक कोमल शरीर वाले कीटों जैसे-मोयला, हरा तैला, सफेद मक्खी को नष्ट कर देता है।