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अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए पशुओं को रोजाना चराना जरूरी
अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए पशुओं को रोजाना चराना जरूरी

Animal Husbandary : पहले जमाने में लोग अपने दुधारू पशुओं को खूंटे से खोलकर हर रोज सुबह गांव के बाहर अन्य पशुओं के साथ विचरने हेतु भेजते थे। इस तरह इन्हें न केवल घूमने-फिरने का अवसर मिलता था बल्कि पशु सामाजिक रूप से भी एक दूसरे के साथ जुड़ाव का अनुभव करते था। यह सामाजिक मेल-मिलाप गायों और भैंसों को न केवल प्रसन्नचित्त रखता है अपितु इन्हें स्वस्थ रखने में भी अपनी भूमिका निभाता है। जब पशु बाहर जाते हैं तो इनके शेड अथवा रहने के स्थान को धोया या साफ किया जा सकता है तथा इसे पूरी तरह सूखने का अवसर भी मिल जाता है। पशुओं को घर से बाहर निकलने पर ताजी हवा और धूप मिलती है, जिससे इनकी त्वचा साफ एवं चमकदार बनी रहती है। साफ-सुथरी त्वचा पर परजीवियों का संक्रमण भी कम होता है। पशुओं के हर रोज चलने-फिरने से इनका व्यायाम होता है. जिससे इनके शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है। बेहतर रक्त संचार बेहतर रक्त संचार के कारण पशु स्वस्थ रहने के साथ-साथ अधिक दूध भी देता है। जो पशु चराई हेतु बाहर जाते हैं वे बहुत कम बीमार पड़ते हैं। परंतु आजकल जगह की कमी के कारण अधिकतर पशु पालक अपने पशुओं को घर में ही रखने के लिए मजबूर हैं।