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जल संरक्षण के लिए फसल चक्र का चुनाव
जल संरक्षण के लिए फसल चक्र का चुनाव

फसल लागत को कम करने के लिए और फसल सधनता को बढ़ाने के लिए ऐसे फसलों का चुनाव करना चाहिए जिसकी  जल मांग कम हो और जल्दी पक कर तैयार हो जाये साथ ही साथ कम लागत हो। अतः ऐसे फसल चक्र का चुनाव करते समय इन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए। उदाहरण के लिए धान -गेहूँ के स्थान पर तिल - सरसों - मूंग के फसल चक्र को अपने फसल चक्र में शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें जल मांग होती है और लागत भी कम लगती है। लाभ भी ज्यादा होता है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण उपाय:

1. भारतीय कृषि बर्षा पर आधारित है। जल संरक्षण का प्रयोग करके कृषि में उपयोग किया जाए। इसी के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना की शुरुआत की गई। बर्षा पर निर्भर कृषि को जुआ कहा गया है क्योंकि अगर बर्षा सही समय पर हुई तो कृषि उत्पादन अच्छा होता है अगर अनियमित और न हुई तो वहुत कम उत्पादन और कभी-कभी तो न के बराबर उत्पादन होता है जिससे फसल लागत भी नहीं निकलती इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आरम्भ किया गया।
2. किसानों के आय के स्रोतों में इजाफा किया जाये या उसकी फसल के मूल्यों में वृद्धि की जाये। मूल्यों में तो वृद्धि MSP के माध्यम से समय-समय पर की जाती रही है। लेकिन कृषि से संबंधित उद्योगों (आय के स्रोत) को इतना महत्व नहीं दिया गया।
3. बाजार- मांग,बाजार मूल्य की जानकारी दी जाये इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने उगे हैं। इसी के लिए ई-नैम योजना को प्रारंभ किया गया।
4. फसल लागत को कम कर दिया जाए।
5. खाद्य प्रसंस्करण करके अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
6. भंडारण करके भी अधिक लाभ लिया जा सकता है क्योंकि जब उचित मूल्य और बाजार में मांग अधिक हो तो फसल उत्पादन को भंडारण से निकाल कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
7. फसल सधंनता को बढाकर किसानों को अधिक लाभ हो सकता है।

फसल लागत को कम करने के लिए उपाय:
फसल लागत को कम करने के लिए और फसल सधनता को बढ़ाने के लिए ऐसे फसलों का चुनाव करना चाहिए जिसकी  जल मांग कम हो और जल्दी पक कर तैयार हो जाये साथ ही साथ कम लागत हो। अतः ऐसे फसल चक्र का चुनाव करते समय इन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए। उदाहरण के लिए धान -गेहूँ के स्थान पर तिल - सरसों - मूंग के फसल चक्र को अपने फसल चक्र में शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें जल मांग होती है और लागत भी कम लगती है। लाभ भी ज्यादा होता है।

क्योंकि धान गेहूं की जल मांग ज्यादा होती है। लागत भी ज्यादा लगती है क्योंकि रोपाई, कटाई, खरपतवार, उर्वरक तो ज्यादा लगते ही हैं साथ ही साथ श्रमिकों की भी ज्यादा आवश्यकता होती है। इसके उलट अगर किसान भाई वताये गये फसल चक्र अपनायें तो उसे कम लागत लगानी पड़ती है। जल की भी वचत होती है जिसका इस्तेमाल जायद की मूंग की खेती में कर सकता है। मूंग की खेती अकेले ही गेहूँ धान की खेती की वचत के बराबर  फायदा देती है। ये भूमि में 25 से 30 kg नाइट्रोजन अगली फसल के लिए एकत्र कर लेती है! और खेत जायद में खाली भी नहीं रहता जिससे मृदा डकी रहती है और मृदा की हानि भी नहीं होती है।

जल संरक्षण के लिए फसल चक्र का चुनाव:आर0 के 0 आर्यन  (कृषि मौसम विज्ञान), नरेंद्र प्रताप वर्मा (फसल कार्यकीय विज्ञान), विकास सिंह सेंगर (कृषि अर्थशास्त्र) एंव रियाज अहमद (कृषि अर्थशास्त्र), आचार्य नरेंद्र देव कृषि एंव प्रौद्योगिकीय विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या उत्तर प्रदेश