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कम्पोस्ट खाद का कृषि में महत्व तथा अपशिष्ट पदार्थो के सदपयोग द्वारा स्वच्छ भारत के निर्माण में योगदान
कम्पोस्ट खाद का कृषि में महत्व तथा अपशिष्ट पदार्थो के सदपयोग द्वारा स्वच्छ भारत के निर्माण में योगदान

कम्पोस्ट खाद का कृषि में महत्व तथा अपशिष्ट पदार्थो के सदपयोग द्वारा स्वच्छ भारत के निर्माण में योगदान

कम्पोस्ट : - कम्पोस्ट जैविक पदार्थों के अपघटन व पुन : चक्रण से प्राप्त खाद है।  
या
कम्पोस्ट- यह कम्पोस्टिंग क्रिया द्वारा निर्मित एक खाद है जिसमे जैवरासायनिक क्रिया द्वारा अवायवीय जीवाणु कार्बनिक पदार्थो को विघटित कर बारीक ह्यूमस में बदल देते है। वह बारीक चूर्ण नुमा पौष्टिक जैव पदार्थ हि कम्पोस्ट कहलाता है। यह पूर्ण सड़ा गला  कार्बनिक पदार्थ होता है। जो पौधों में पोषक तत्वों कि उपलब्धता बढ़ाने के साथ - साथ मृदा में वायुसंचार व जलधारण क्षमता को भी बढ़ाता है।

कम्पोस्ट बनाने के लिए अवशिष्ट पदार्थों कि उपलब्धता;
खेतों एवं गांवों से जो अपशिष्ठ पदार्थ प्राप्त होते है उनमें मुख्यत :  पेड़ पौधो कि पतियाँ, फसलो का अवशेष, पशुओं का बचा हुआ चारा खरपतवार आदि का सदुपयोग तरीके से निपटान करके कम्पोटिंग किया द्वारा कम्पोस्ट खाद बना सकते है। तथा ग्रामीण क्षेत्र में ये अवशिष्ट मुख्य रूप से पाए जाते है। इसके साथ साथ शहरों व कस्बों में कूड़ा करकट कार्बनिक अवशिष्ट पदार्थ जैसे : - शहर का कूड़ा-करकट कार्बनिक कचरा, शहर का गन्दा मल आदि का सुव्यवस्थित निपटान करके किसान अच्छी कम्पोस्ट खाद तैयार कर सकते है।

स्वच्छ मिशन का कृषि अपशिष्ट प्रबंधन पर प्रभाव तथा उपयोगिता;
स्वच्छ भारत मिशन की शुरआत 2oct 2014 को सम्पूर्ण देश में की गई जो की देश का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान बना इसका प्रभाव शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रो में भी देखने को मिला, देश का प्रत्येक युवा वर्ग तथा छात्रों ने इस अभियान को सफल बनाया तथा इसकी महत्त्वता को भी अपने जीवन में उतरा। इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक रहा क्योंकि किसानों एवं कृषि छात्रों एवं कृषि वैज्ञानिको ने कम्पोस्ट खाद की महत्व तथा उपयोगिता कोबनाकर सिद्ध किया जिसमें ग्रामीण क्षेत्रो से प्राप्त गोबर, कच्ची लकड़ी, पेड़ पौधों की पत्तियां आदि अपशिष्ट पदार्थो के सरंक्षण होने से स्वच्छता में भी बढ़ोतरी हुई है इस तरह स्वच्छता मिशन शहरी कच्चे अपशिष्ट पदार्थो के निपटान में सहायक है। क्योंकि उस अपशिष्ट पदार्थ के साथ साथ गोबर व मूत्र आदि बिछावन बनाकर एक अच्छी कम्पोस्ट खाद तैयार की जा सकती है
इसी प्रकार हम सार्वजानिक क्षेत्रो से पत्तियां फूल,लकड़ी का बुरादा, बचा हुआ भोजन, आदि प्राप्त करके सार्वजनिक स्थलों को सुन्दर बना सकते है। तथा साथ ही साथ कम्पोस्ट बनाने के लिए सामाग्री मिल जाती है तथा जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलता है ।

कम्पोस्ट बनाने के लिए, कम्पोस्ट टैंक भरने की विधि; 
टैंक भरने से पूर्व गोबर का गोल बनाकर टैंक की निचली सतह तथा दीवारों की अंदर सतह पर छिड़काव किया जाता है। तथा उसके बाद आगामी 2 दिन में टैंक को पूर्ण भरने की प्रक्रिया की जाती है।
प्रक्रिया;
1. टैंक की निचली सतह पर 6 इंच मोटि (फार्म पर उपलब्ध वानस्पतिक पदार्थ) वानस्पतिक अवशेषों की परत लगाई जाती है। जिसमे कृषि कृषि फसलो के अवशेष, पत्तियां, अपशिष्ट बागवानी का पदार्थ तथा अन्य पशुओं का पराली युक्त बिछावन हो सकता है।
2. प्रथम 6 इंच मोटी वानस्पतिक अवशेषों की परत पर गोबर की परत या गोबर तथा पानी मिश्रित करके लेहि बनाई जाती है, उस लेहि की परत को दूसरी परत के रूप में ऊपर चढ़ाते हैं।
(5-10 किलो ग्राम गोबर तथा 120 से 150 लीटर पानी मिश्रित करके लेहि बनाते है।)
3. दूसरी परत के ऊपर एक परत साफ सुथरी सुखी छन्नी मिटटी की परत बिछाई जाती है। तथा इसके ऊपर पानी का छिड़काव करके गिला कर देते है। इस तरह क्रमशः जब तक परतो की तह लगाते है, जब तक की टैंक पूर्ण रूप से भर नही जाता, टैंक पूर्ण भरने के बाद उसके ऊपरी भाग को झोपड़ीनुमा आकार देकर मिट्टि से ढक देते है। मिटटी से ढकने के बाद टैंक का अच्छी तरह से लेपन किया जाता है। ताकि अंदर की गैसे दरार बनाकर बाहर न निकले।
इस तरह कम्पोस्ट बनाने में 3-4 माह लगता है।

लाभ;
कम्पोस्ट से प्राप्त सूक्ष्म एवं वृहद पोषक तत्व एवं कार्बनिक पदार्थ का मृदा की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है। कम्पोस्ट से मृदा में कार्बनिक पदार्थ का भंडार होती है। इसके विघटन से मृदा की सरंधरता में सुधार होता है। तथा मृदा की जल अवशोषण क्षमता बढ़ जाती है। तथा मृदा की सतह मुलायम होने के कारण सूर्य की किरणो का रन्ध्रों में प्रवेश करना जिससे कीटो व सूक्षम जीवो का नियंत्रण भी हो जाता है।
फार्म कम्पोस्ट पर तैयार खाद में 0.8 से 1.2% नाइट्रोजन, 0.4 से 0.6% फॉस्फोरस इसके साथ एवं 2-3% तक पोटेशियम प्राप्त होते है।
साधारणतय कम्पोस्ट में नाइट्रोजन व फोस्फोरस की मात्रा बढ़ाने के लिए क्रमशः एजोटोबैक्टर तथा सुपेरफॉस्फेट डालते है। साथ हि जिप्सम , चुना , डोलोमाइट  इत्यादि डालने से  खाद की गुणवता बढ़ने के साथ साथ खाद मे पोषक तत्वों का नुकसान भी कम हो जाता है ।

कम्पोस्ट खाद की कृषि महाविद्यालय में उपलब्धता तथा स्वचछता में कृषि महाविद्यालय का योगदान;


एपेक्स कृषि महाविद्यालय चईया के  बी एस कृषि ( ऑनर्स) तृतीय वर्ष का छात्र संजय साईं ने शस्य विज्ञान विशेषज्ञ  मनीराम जी जाखड़ न व अपेक्स संस्थान के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में, कृषि में कम्पोस्ट खाद की आवश्यकता को देखते हुए तथा साथ ही साथ कॉलेज परिसर एवं आस-पास के 200 मीटर ग्रामीण क्षेत्र से कम्पोस्ट बनाने की सामग्री गोबर,पशुओं का बिछावन (पराली,भूसा), रेतीली मिटटी तथा अन्य गलन युक्त सामग्री , नीम  के अवशेष (पत्तियां, फूल, हरी घास इत्यादि) को इकट्ठा करके तकनीकी रूप से कम्पोस्ट खाद तैयार की जिसमे महाविद्यालय को 15-18 टन के करीबन जैविक खाद प्राप्त हुआ इसे महाविद्यालय परिसर मे स्थित  एग्रोनॉमी फॉर्म, नर्सरी एवं सजावटी पौधों में डालकर इसकी महत्व को परखा, इस तकनीक ने अपशिष्ठ के निपटान व महाविद्यालय की जरूरतों को पूरा किया, आगामी समय में एपेक्स कृषि महाविद्यालय चईया ने इस तकनीकी को महाविद्यालय के ऊपरी स्तर बढ़ाने एवं आस-पास के किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कम्पोस्ट बनाने की विधिबता कर अपने फील्ड पर शुद्ध जैविक खेती शुरू करने की एक मुहिम पहल की है। जिसमे कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त हो सके औ रबढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के नियंत्रण एवं स्वच्छता में अपना योगदान दे सके।