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धनिया की खेती
धनिया की खेती

गोविंद कुमार1, अमित सिंह1, संजय दत्त गहतोड़ी1,  डा. सुशील कुमार1, हर्षित राज 2 एवं संजय कुमार2  
1.    असिस्टेंट प्रोफेसर, 2. चतुर्थ वर्ष,  तृतीय वर्ष बी. एस. सी.
डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, शिवालिक इंस्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्ट्डीज देहरादून उत्तराखंड

अगर बात महक या स्वाद को बढ़ाने की हो तो हरे धनिए कौन भूल सकता है। हरा धनिया डालने से आपकी हर डिश बहुत ही टेम्पटिंग जाती है। स्वाद बढ़ाने वाली ये मैजिक पत्तियां धनियां की ही होती है। धनियां को क्वीन ऑफ स्पाइसेज के नाम से भी जाना जाता है इनमें प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल होते हैं। इसके अलावा हरे धनिया में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी भी पाया जाता हैं।  बारिक छोटे टूकडो में कटे  धनिया के पत्तों कोगरम सूप के कटोरे, सब्जी या पावभाजी या फिर मैगी के ऊपर छिड़कने मात्र से ही लुभावना स्वाद आता है, इसमें बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं। इसके पत्ते, उपजी, बीज और जड़ें, प्रत्येक का अपना एक अलग ही  स्वाद होता है।
वानस्पतिक नाम: कोरिएनड्रम सटिवुम 
संस्कृत: धनियाका
हिंदी: धनिया

प्राचीन काल में विश्व में भारत देश को ‘‘मसालों की भूमि‘‘ के नाम से जाना जाता है। धनिया के बीज एवं पत्तियां भोजन को सुगंधित एवं स्वादिष्ट बनाने के काम आते है। धनिया बीज में बहुत अधिक औषधीय गुण होने के कारण कुलिनरी के रूप में, कार्मिनेटीव और डायरेटिक के रूप में उपयोग में आते है । धनिया अम्बेली फेरी या गाजर कुल का एक वर्षीय मसाला फसल है। इसका हरा धनिया सिलेन्ट्रो या चाइनीज पर्सले कहलाता है। 
धनिया एक बहुमूल्य बहुउपयोगी मसाले वाली आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी फसल है। भारत धनिया का प्रमुख निर्यातक देश है। धनिया के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है।

जलवायु 
बीजों के अंकुरण के लिय 22से 25 डिग्री  से.ग्रे. तापमान अच्छा होता है। 


मिट्टी
दोमट, मटियार या कछारी भूमि जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश और अच्छी जल धारण की क्षमता हो।

धनिया की उन्नत किस्में
पंत धनिया -1, मोरोक्कन, सिम्पो एस 33, गुजरात धनिया -1, गुजरात धनिया -2, ग्वालियर न.-5365, जवाहर धनिया -1, सी. एस.-6, आर.सी.आर.-4, यु. डी.-20,436, पंत हरीतिमा, सिंधु। 

भूमि का चुनाव एवं उसकी तैयारी
धनिया की सिंचित फसल के लिये अच्छा जल निकास वाली अच्छी दोमट भूमि और असिंचित फसल के लिये काली भारी भूमि अच्छी होती है।

बुवाई का समय
10 अक्टुंबर से 25 नवंबर बुवाई का उचित समय रहता है। बुवाई के समय अधिक तापमान होने पर अंकुरण कम होता है।

बीज की मात्रा व बीजोपचार
20से 22 किग्रा प्रति हैक्टेयर।

बीजोपचार : 
दो ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। 

बुवाई की विधि
20 से 30 सेमी. कतार से कतार कतार और 5 से 10 सेमी. पौधों से पौधे की दुरी रखते हैं। असिंचित क्षेत्रों में  बीजों को 6 से 7 सेमी. गहरा बोना चाहिए और सिंचित क्षेत्रों में बीजों को 1.5 से 2 सेमी. की गहराई पर बोना चाहिए। 

निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण
धनिये में शुरूआती बढ़वार धीमी होने के कारण निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकलना चाहिए। धनिये में दो निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमिथालीन 1लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर अंकुरण से पहले छिड़काव कर सकते है। छिड़काव के समय भूमि में पर्याप्त नमी होना चाहिए। 

सिंचाई
पलेवा के अलावा दो-तीन सिंचाई की आवश्यकता होती हैं।

धनिया एक ऐसी फसल होती है, जिसे किसान मसालों के रूप में तो बेचता ही है, साथ ही हरे धनिया से भी अच्छा मुनाफा कमा सकता है।