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कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन
कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन

डा.विकास सिंह सेंगर1, डा. सुशील कुमार1, गोविंद कुमार1, संजय दत्त गहतोड़ी1, अमित सिंह1 एवं आदित्य अभिनव2
1.    असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, शिवालिक इंस्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्ट्डीज देहरादून उत्तराखंड
2.    तृतीय वर्ष बी. एस. सी., कृषि संकाय, शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज

सरकार फसलों का उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, फसल उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और खेती से जुड़े बाजारों का सुधार कर रही है किसानों के हित में आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उतार चढ़ाव की समस्या से बचने के लिये ‘ऑपरेशन ग्रीन’ योजना शुरू की गई है। भारतीय किसानों के समक्ष गम्भीर समस्या उत्पादन का सही मूल्य न मिलना है। बिचौलियों और दलालों के कारण किसानों को कृषि उत्पाद बहुत कम दामों में बेचने पड़ते हैं। कृषि उत्पाद जैसे सब्जियाँ, फल,फूल, दूध और दुग्ध पदार्थ बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। इन्हें लम्बे समय तक संग्रह करके नहीं रखा जा सकता है। और न ही किसानों के पास इन्हें संग्रह करने की सुविधा|राष्ट्रीय-स्तर पर छोटे और सीमान्त किसानों की संख्या 86%  है। इनके थोक मंडियों तक पहुँचना आसान नहीं है। मंडियाँ दूर होने से उपज आसपास के बिचौलियों व व्यापारियों के हाथों बेचने के लिये मजबूर होते हैं। सरकार स्थानीय मंडियों व ग्रामीण हाटों को विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है।
कृषि और इससे सम्बन्धित उद्यम की हालत में सुधार व इनको अपनाते समय निम्नलिखित मुख्य बातों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए 
1. किसानों की आय में बढ़ोत्तरी।   
2. कृषि जोखिम में कमी । 
3. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े।
4. कृषि क्षेत्र का निर्यात बढ़े।       
5. ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
6. इसके अलावा कृषि का बुनियादी ढाँचा विकसित हो।
ग्रामीणों किसानों व पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिये देश में कृषि उद्यम के अनेक विकल्प हैं जिन्हें अपनाकर किसान  आय बढ़ाने के साथ जीवन स्तर ऊँचा कर सकते हैं। इन उद्यम से बड़े उद्योगों की अपेक्षा प्रति इकाई पूँजी द्वारा अधिक लाभ कमाया जा सकता है। उद्यम रोजगारपरक भी होते हैं। कृषि एवं इससे सम्बन्धित उद्यम  किसानों की आय व ग्रामीण युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़ा सकते हैं

कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन : फसलों से प्राप्त उत्पादों के प्रसंस्करण और परिरक्षण से मूल्य संवर्धन किया जा सकता है जैसे कि मूँगफली से भुने हुए नमकीन दानें, मूँग से नमकीन बनाना, चिक्की,दूध व दही बनाना; आलू व केले से चिप्स बनाना; गन्ने से गुड़ बनाना, गुड़ के शीरे व अंगूर से शराब व अल्कोहल बनाना, सोयाबीन से दूध व दही बनाना; फलों से शर्बत, जैम, जेली व स्क्वैश बनाना, तिलहनों से तेल निकालना, दलहनी उत्पादों से दालें बनाना, धान से चावल निकालना आदि। इसके अलावा दूध के परिरक्षण व पैकिंग के  इससे और बनने वाले विभिन्न उत्पादों दूध का पाउडर, दही, छाछ, मक्खन, घी, पनीर आदि के द्वारा दूध का मूल्य संवर्धन किया जा सकता है। लाख से चूड़ियाँ तथा खिलौने बनाना, फूलों से सुगन्धित इत्र बनाना, कपास के बीजों से रुई अलग करना व पटसन से रेशे निकालने के अलावा कृषि के विभिन्न उत्पादों से अचार एवं पापड़ बनाना आदि के द्वारा मूल्य संवर्धन किया जा सकता है|कम पूँजी लगाकर स्वरोजगार प्राप्त करके आय में इजाफा किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग श्रम आधारित होता है। इसे निर्यात का प्रमुख उद्योग बनाकर कामगारों के लिये रोजगार के काफी अवसर पैदा किये जा सकते हैं।
किसानों की कड़ी मेहनत के बाद कृषि उत्पाद प्राप्त होता है किसान इसे ऐसे ही बेच देता है। इससे किसानों को ज्यादा लाभ नहीं हो पाता। लेकिन इस उत्पाद का मूल्य संवर्धन (वेल्यू अडिशन) किया जाए तो उत्पाद के दाम और बढ़ जाएंगे और किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। मूल्य संवर्धन , उत्पाद की महत्ता को और बढ़ाना, जो किसान खेती के साथ साथ 5-6 मवेशी पालते हैं, दूध का कारोबार करते हैं, मूल्य संवर्धन कर सकते हैं। यानि की महज दूध नहीं बेचना, दूध का दही बनाकर बेचे, या पनीर बनाकर बेचे तो दाम ज्यादा मिलेंगे।

घर के दूध से पनीर तैयार कर कलाड़ी तैयार कर बेच सकते हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ जाएगी।। यानि कि घर का चार पांच किलो दूध जोकि उनको डेरी से डेढ़ सौ रुपये दिलाता था, लेकिन मूल्य संवर्धन से आठ सौ रुपये तक कमाए जा सकते हैं। अगर किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं तो उनको जैविक सब्जियों की खेती पर आना चाहिए। क्योंकि दूसरी सब्जियों के मुकाबले जैविक सब्जियों के दाम ज्यादा मिलते हैं। धान उत्पादक पारपंरिक बासमती जोकि अपनी महक व स्वाद के लिए मशहूर है, मूल्य संवर्धन से उत्पाद के महत्व को और बढ़ा सकते हैं, बासमती उत्पाद की कीमत बढ़ जाएगी। इससे दाम बढऩा निश्चित है। ऐसे ही अनेक तरीकों से किसान अपने उत्पाद का महत्व बढ़ा कर अच्छी कमाई कर सकते है। अब मूल्य संवर्धन का जमाना है। कड़ी मेहनत से तैयार फसल को सीधे बेचने के बजाय उसमें मूल्य संवर्धन करना चाहिए, ताकि मुनाफे के साथ अधिकतम मूल्य मिल सके। किसान अपने उत्पाद में मूल्य संवर्धन बड़ी आसानी से कर सकते हैं। बस इसके लिए जागरूक होने की आवश्यकता है।

एक लीटर दूध की कीमत 50 रूपये है, यदि आप दूध से मक्खन एवं छाछ को अलग कर दें तो करीब 150 रुपये मिल सकते हैं। दूध से कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। इसी तरह सोयाबीन से , दूध एवं  दूध से पनीर बना सकते हैं। सोयाबीन से बने दूध, पनीर की मांग भी बाजार में है। बाजार में बाजरे से पास्ता एवं पफ बनाया जाता है। आलू से  चिप्स की कीमत आलू की तुलना में कई गुणा अधिक  है। किसानों को बाजार की मांग एवं प्रचलन के अनुसार  बदलना होगा। कई ऐसी तकनीक विकसित की गई हैं, जिनका इस्तेमाल कर किसान अपने उत्पादों में आसानी से मूल्य संवर्धन कर सकते हैं। किसान आज अपने उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर अच्छा खासा मुनाफा कमा  सकते हैं।