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रीपर बाइंडर: किसानों के लिए वरदान, 40 मजदूरों के बराबर करें काम
रीपर बाइंडर: किसानों के लिए वरदान, 40 मजदूरों के बराबर करें काम

रीपर बाइंडर मशीन श्रम लागत में कटौती करते किसानों को बहुत फायदा पहुंचाती है। आज सभी जानते हैं कि इस समय देश के खेतों में रबी की फसल लहलहा रही है। मार्च महीने के अंतिम दिनों से फसल कटाई का काम शुरू हो जाएगा, जो मई माह तक चलेगा। फसल कटाई के लिए श्रमिकों की आवश्यकता होगी। वहीं देश में एक साथ कटाई का सीजन शुरू होने पर अमूमन हर साल श्रमिकों की कमी हो जाती है और मजदूरी बढ़ जाती है। कोरोना लॉकडाउन के बाद से कई प्रदेशों में श्रमिकों की संख्या में कमी आई है। लेकिन आधुनिक किसानों को अब परेशान होने की जरुरत नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में हम आपको रीपर बाइंडर मशीन के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। यह मशीन 40 मजदूरों के बराबर काम करती है और एक घंटे में एक एकड़ जमीन की फसल काट सकती है।

कई मशीनों ने कृषि के कार्य को आसान बना दिया है। जिन कामों को करने में पहले कई दिन लग जाते थे, वो काम अब कुछ घंटों में हो जाते हैं। पहले फसलों की कटाई में लंबा समय और श्रमिक श्रम लगता था लेकिन अब फसल कटाई मशीनों ने इस काम को और आसान बना दिया है। रीपर बाइंडर मशीन को फसल की कटाई के लिए बनाया गया है। यह मशीन फसल की कटाई के साथ-साथ रस्सियों से उनका बंडल भी बनाती है। इस यंत्र की सहायता से खेत में 5 से 7 सेमी ऊपर फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है। इस यंत्र के कारण भूसे का नुकसान नहीं होता है। इस मशीन से 85 सेमी से 110 सेमी ऊंचाई वाली गेहूं, जौ, धान, जेई और अन्य फसलों की आसानी से कटाई कर बंडल बनाया जाता है।
रीपर बाइंडर और कंबाइन हार्वेस्टर में अंतर:रीपर बाइंडर और कंबाइन हार्वेस्टर दोनों ही मशीन फसल की कटाई में काम आती है। रीपर बाइंडर मशीन छोटे किसानों के लिए उपयोगी है। वहीं कंबाइन हार्वेस्टर बड़े किसानों के लिए उपयोगी है। रीपर बाइंडर मशीन की सहायता से जमीन से 5 से 7 सेमी ऊपर फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है और भूसे का नुकसान नहीं होता है। कंबाइन हार्वेस्टर खेत में करीब 30 सेमी से ऊपर फसल की कटाई करता है। जिससे कटाई के बाद फसल का ठूठ खेत में ही खड़े रह जाते हैं। जिससे किसानों को बहुत नुकसान होता है। क्योंकि फसल से मिलने वाले भूसे का नुकसान हो जाता है। वहीं दूसरी ओर कई बार किसान खेत में खड़े ठूठ में आग लगा देते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। इसलिए रीपर बाइंडर का उपयोग बहुत अच्छा माना जाता है।

रीपर बाइंडर का उपयोग / विशेषताएं :- फसल कटाई के लिए मजदूरों की कमी होने पर रीपर बाइंडर का उपयोग किया जाता है।- रीपर बाइंडर मशीन के उपयोग से समय, धन और मजदूरी की बचत होती है।- इस मशीन से 85 सेमी से 110 सेमी तक ऊंचाई वाली फसलों को आसानी से काटा जा सकता है।- रीपर बाइंडर मशीन का उपयोग गेहूं, जौ, जेई, धान सहित अन्य फसलों की कटाई में किया जाता है।- रीपर बाइंडर मशीन एक घंटे में एक एकड़ भूमि पर खड़ी फसल काट सकती है। - इस मशीन के माध्यम से फसल को काटने के साथ-साथ उनका बंडल भी बनाया जा सकता है।- यह मशीन बारिश के समय और पेटाकाश्त की जमीन पर भी आसानी से कार्य कर सकती है।- इससे खेतों में उगने वाली झाडिय़ों की भी आसानी से कटिंग की जा सकती है।- इस मशीन में छोटी टाई लगाकर करीब 5 क्विंटल तक का भार ढोया जा सकता है।- रीपर बाइंडर मशीन के उपयोग से भूसे का नुकसान नहीं होता है।- रीपर बाइंडर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है।- यह यंत्र टिकाऊ है और लंबे समय तक चलता है।

ऑनलाइन रीपर मशीन / रीपर मशीन के प्रकार:बाजार में कई तरह की रीपर मशीन उपलब्ध है। इसमें ट्रैक्टर चलित रीपर, स्ट्रा रीपर, स्वचालित रीपर और रीपर बाइंडर मशीन शामिल है। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार रीपर मशीन का चयन कर सकते हैं। रीपर मशीन से किसान कम समय व कम लागत में फसलों की कटाई कर सकते हैं। आजकल पोर्टेबल पावर टिलर काफी प्रचलित हैं। इन्हें सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर भी कहा जाता है। ये छोटे खेतों में जुताई, निराई के साथ रीपर फिट करने पर धान-गेहूं की कटाई भी कर सकते हैं। 
रीपर बाइंडर की कीमत / रीपर बाइंडर ऑनलाइन प्राइज:देश में कई कंपनियां रीपर बाइंडर का निर्माण करती है। अलग-अलग कंपनियों के रीपर बाइंडर की कीमतों में अंतर पाया जाता है। सामान्यत रीपर बाइंडर की कीमत 80 हजार रुपए से लेकर चार लाख रुपए तक होती है।

रीपर बाइंडर कंपनियां: ट्रैक्टर जंक्शन पर केएस ग्रुप, करतार, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, बख्सिश, लैंडफोर्स, दशमेश, मलकित, वीएसटी शक्ति, खेदूत आदि कंपनियों के रीपर, रीपर बाइंडर, स्ट्रा रीपर आदि उपलब्ध है। रीपर बाइंडर के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के लिए ट्रैक्टर जंक्शन के साथ बने रहिए।

रीपर बाइंडर पर सब्सिडी:राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर किसानों को रीपर बाइंडर पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। सब्सिडरी की दरें और पात्रता की शर्तें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है।