n
Social Share:
चंबल के बीहड़ों में उगेगा BIO-FUEL, ज्वार-बाजरा से दौड़ेंगी कारें

ग्वालियर। शहर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि (RVSKVV) वाहनों में प्रयुक्त होने वाले ईंधन (पेट्रोलियम) की समस्या का समाधान निकालने के लिए रिसर्च कर रही है। मोटे अनाज के Biomass (करब) से एल्कोहल आधारित बायोफ्यूल विकसित करने के लिए करीब 11 करोड़ रुपए की परियोजना में RVSKVV ने अपनी टेरिटरी के  किसानों के खेतों में प्रयोग किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने ज्वार-बाजरा की पांच ऐसी किस्में विकसित कर ली हैं जिनसे BIO-FUEL बनाया जा सकेगा।
 
RVSKVV ने तैयार किए BIOFUEL के लिए खास किस्म के बीज
इस परियोजना के तहत RVSKVV को अपनी टेरिटरी में मोटे अनाज उगाकर ईंधन समस्या का हल खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 'भारत-अमेरिका कंसोर्टियम फॉर डवलपमेंट ऑफ सस्टेनेबल एडवांस्ड लिंग्नोसेलुलोजिक बायो-फ्यूल परियोजना के तहत RVSKVV थर्ड-जनरेशन-बायो-फ्यूल के लिए बीज विकसित कर रही है। RVSKVV के Director Research प्रो.एचएस यादव और इनके सहयोगी सुधांशु जैन, डॉ.एससी श्रीवास्तव और इंदौर के वैज्ञानिक डॉ.डीके श्रीवास्तव ने ज्वार और बाजरा की ऐसी किस्में विकसित कर ली हैं जिनके तने सेलुलोज और सुगर की मात्रा ज्यादा होती है। वैज्ञानिकों के निर्देशन में किसानों के खेतों में किए गए अब तक प्रयोगों मे इन किस्मों में बायोमास की मात्रा बढ़ाने में तो कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन पैदावार अपेक्षित से कम रही है। आने वाले सालों में इन किस्मों की पैदावार बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत विकसित किए जा रहे बीजों से मध्यप्रदेश, पंजाब और गुजरात में उगाई जाने वाली ज्वार बाजरा की फसलों को खरीदकर उससे बायोफ्यूल बनाया जाएगा।