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जीरा - 32 धान की खेती को बढ़ावा देगा कृषि विभाग

 

चंदौली : चावल की खेती (धान) में कृषि विभाग की ओर से जीरा-32 धान की प्रजाति को बढ़ावा दिया जाएगा। इसको देखते जिलाधिकारी नवनीतसिंह चहल के निर्देश पर शुक्रवार को उप कृषि निदेशक विजयसिंह ने चकिया के रामपुर कलां गांव में फसल का स्थलीय निरीक्षण किया। आने वाले दिनों में फसल की क्राप कटिंग कराने के बाद पोषणीय विश्लेषण को कर्नाटक भेजा जाएगा ताकि प्रजाति की बड़े पैमाने पर खेती कराई जा सके।

 

कृषि प्रधान जनपद के अन्नदाता जीरा-32 धान की प्रजाति का उचित मूल्य व बाजार न मिलने से इसकी खेती से विमुख होते जा रहे हैं। इक्का-दुक्का बड़े किसान उक्त प्रजाति की खेती करते हैं। छोटे व मझोले किसान इस प्रजाति की खेती से कोसों रह गए हैं। कारण नाटी मंसूरी व अन्य प्रजातियों की खेती से अधिक मुनाफा होता है। यदि नाटी मंसूरी एक बीघे में 40 मन होती है तो जीरा-32 के उत्पादन की मात्रा काफी कम है। ऊपर से उत्पादन अच्छा भी हुआ तो मार्केट न मिलने से बिक्री को लेकर किसान हताश व निराश हो जाते हैं। जिला प्रशासन ने जीरा-32 को बढ़ावा देने को ठोस पहल करने का निर्णय लिया है, ताकि इस प्रजाति को जनपद का ब्रांड बनाया जा सके। कृषि उपनिदेशक ने बताया कि रामपुर कलां गांव में किसान संतोष कुमारसिंह ने एक हेक्टेअर में जीरा-32 की खेती की है। फसल की स्थिति बेहतर है। आने वाले दिनों में जिलाधिकारी की उपस्थिति में फसल की क्राप कटिंग कराने के बाद पोषणीय विश्लेषण को कर्नाटक भेजा जाएगा ताकि फसल की भौगोलिक संरचना का इंडीकेशन कराया जा सके। कहा जीरा- 32 का उचित मूल्य व बाजार उपलब्ध होने से किसानों में इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ेगा।