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हाई क्लास डिश बनेगी अब बाजरा, कोदो, रागी

 

बिहार। हाई क्लास डिश बनेगी अब बाजरा, कोदो, रागी, इसी के बीच पोषक तत्वों से भरपूर बाजरा, कोदो व रागी जैसे फसलों के अब दिन सुधरेंगे। हालांकि, हम जानते है बीते कुछ वर्षो में इस फसल की डिमांड नहीं थी, तो किसानों ने इसका उत्पादन भी बंद कर दिया था। नतीजतन, यह अनाज बाजार से लगभग गायब हो गया है। किसान भी इसे गरीब या मोटे अनाज कहकर किनारा कसने लगे थे। हाल के दिनों में इसकी डिमांड बढ़ने के बाद अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने फिर से इन फसलों को उगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है। साथ ही इसके कई प्रभेदों पर अनुसंधान भी शुरू कर दिया है।

 

कम जलस्रोत से बंजर और सूखी जमीन पर भी फसल को उगाया जाता था। खर्च भी नहीं के बराबर था। गेहूं और धान की पैदावार में इस फसल के मुकाबले काफी खर्च था। इसलिए छोटे और मझौले किसान बाजरा, कोदो, रागी की फसल का उपयोग वर्ष भर करते थे। तकनीक विकसित हुई किसानों ने गेहूं और धान की उपज शुरू कर दी। धीरे-धीरे रागी, बाजरा, कोदो गायब हो गया।

 

पोषक तत्व है इस आनाज में

 

अनेको शोध में यह पता चला है कि मोटे अनाज में आयरन, जिंक, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिंस, प्रोटीन आदि धान, गेहूं की तुलना में 10-12 गुना पाया जाता है। साथ ही इसमें कई गंभीर बीमारी हृदय रोग, कैंसर, मोटापा, शुगर आदि से लड़ने की काफी क्षमता है। इसकी जानकारी होते ही इसकी उपयोगिता बढ़ गई और डिमांड भी होने लगी।

 

बीएयू ने शुरू किया अनुसंधान

 

परियोजना के मुख्य अन्वेषक सह कोऑर्डिनेटर डॉ. महेश कुमार सिंह और प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके सोहाने बताते हैं कि यह फसलें एक तो अपनी पहचान खोती जा रही थी दूसरी ओर इसकी मांग बढ़ती जा रही है। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है वो बाजार के हिसाब से किसानों को फसलों के उत्पादन के लिए प्रेरित करे। उसी हिसाब से इस फसल के उत्पादन के लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा। हाल में अनुसंधान परिषद की बैठक में इन फसलों के अनुसंधान करने पर चर्चा हुई थी। उसके बाद विश्वविद्यालय में लगने वाले किसान मेले में इस बार इन्हीं फसलों को फोकस करते हुए विषय जैविक खेती एवं पोषक अनाज के माध्यम से किसान समृद्धि रखा गया है। ताकि किसान इस फसल को लेकर जागरूक हों और अपनी आय को बढ़ा सके।

 

इसका अब मुंगेर कृषि विज्ञान केंद्र में शोध शुरू

 

मोटे अनाजों के कई प्रभेदों पर कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर में अनुसंधान किया गया है। इसमें बिहार के परिपेक्ष्य में रागी, कोदो एवं बाजरा के उन्नत प्रभेद को निकाला गया है। इस बार विश्वविद्यालय के मुख्यालय में भी चार फसलों पर अनुंसधान प्रारंभ कर दिया गया है। फसलों के विकास पर पहल जारी है। अनुपयोगी भूमि में कम सिंचाई व कम खर्च में इसका उत्पादन किया जा सकता है। बाजार में इसकी बहुत मांग बढ़ती जा रही हैं। किसानों की समृद्धि में इस मोटे अनाज की अहम भूमिका होगी।

 

डॉ. अजय कुमार सिंह कुलपति, बीएयू सबौर भागलपुर