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तितली ले उड़ी किसानों का दिल

 

बिहार (बांका)। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवातीय तूफान भले ही उड़ीसा में तबाही मचा रहा है, पर गुरुवार को यह बांका में बर्बाद हो रही धान की फसल पर अमृत बन कर बरसा। सुबह आठ बजे के बाद लगातार जारी बूंदाबांदी से अच्छा पानी उतर आया है। करीब महीने भर बाद बारिश की बूंदें पाकर धान का पौधा तृप्त हुआ है। शाम की बारिश से खेत की मिट्टी में कुछ नमी आ गई है। रूक-रूक कर अच्छी बारिश भी हो रही है। हालांकि अभी खेतों में पानी नहीं हुआ। आसमानी लक्षण और मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगर बारिश गुरुवार रात भर जारी रही तो खेतों में बढि़या पानी हो जाएगा। तब खेतों में बाली निकलने तक के लिए पर्याप्त पानी हो जाएगा। इस पानी का इंतजार किसान 35 दिनों से कर रहे थे। नक्षत्र का इंतजार और उनके अब तक के सभी यत्न बेकार गए थे। अब कई इलाके के किसान धान की फसल से निराश हो चुके थे। उनकी फसल में बाली निकलने की संभावना समाप्त होती जा रही थी। ऐसे में चक्रवाती तूफान के साथ आई यह बारिश किसानों का दिल जीतने में कामयाब रही है।

 

अब मरने से बच जाएगा धान

किसान बत्तीस राम, अनिलसिंह, ब्रह्मदेव चौधरी आदि ने बताया कि पानी के अभाव में कई इलाके के धान में बाली नहीं निकल पा रही थी। कई जगह फसलें सूख भी गई थी। अभी थोड़ी बारिश हुई है। थोड़ी और बारिश हो जाने से खेतों में जान आ जाएगी। जिससे बाली निकलने की संभावना बढ़ जाएगी। निश्चित रुप से समय पर अबकी बारिश नहीं होने से धान की फसल में पर्याप्त बढ़वार नहीं हो सकी। फसल का उत्पादन निश्चित रुप से प्रभावित होगा। लेकिन, अब बारिश होने से कुछ ना कुछ फसल की संभावना बरकरार रहेगी।

 

शहर की खत्म हुई रौनक

दशहरा को लेकर महालया के दिन से ही शहर की रौनक देखते ही बन रही थी। दिन भर बाजार गुलजार रह रहा था। मंगलवार और बुधवार को बाजार में लंबे समय बाद रात नौ बजे तक भीड़भाड़ दिखी थी। लेकिन, गुरुवार को सुबह से ही लगातार बारिश ने शहर की रंगत बिगाड़ दी है। शहर में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। जरूरी काम वाले लोग भी बाजार निकले। वहीं रूक रूक कर हो रही बारिश से शहर में भी कीचड़ हो गया है। चौक चौराहे पर जहां तहां पानी जमा हो गया है।