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बट रहे खेत, बढ़ रहा बोझ, देश के किसानों के लिए खेती करना एक बड़ी चुनौती

 

नई दिल्ली। कृषि को लाभ का सौदा बनाने के लिए खेती का बोझ घटाने की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। बढ़ती आबादी और परिवारों में होते बंटवारे के चलते खेतों के लगातार छोटे टुकड़े हो रहे हैं जिससे खेती पिछड़ रही है। छोटी होती जोत के हिसाब से कृषि मशीनरी और आधुनिक टेक्नोलॉजी का सख्त अभाव इसकी मुश्किलों को और कठिन बना रहा है। खेतों की संख्या में कई गुना की वृद्धि हुई है।

 

छोटे खेतों के लिए कृषि मशीनरी न होने से उत्पादकता प्रभावित

 

खेती से बाहर निकलकर उसके बोझ को घटाने का उचित विकल्प नहीं है। गांवों में स्थानीय स्तर पर कोई अन्य रोजी रोजगार के न होने से खेती की चुनौतियों और गंभीर हो रही हैं। सीमांत किसानों के पास एक एकड़ से भी कम खेती रह गई है। देश के किसानों के खेत की साइज सवा दो हेक्टेयर से घटकर एक हेक्टेयर रह गई है। इसमें साल दर साल गिरावट दर्ज की जा रही है। एग्रीकल्चर गणना के ताजा आंकड़ों में इसका खुलासा किया गया है।

 

देश में किसानों की कुल संख्या 14.57 करोड़ हो चुकी है, जो पांच साल पहले 13.83 करोड़ थी। इनमें लघु व सीमांत किसानों की संख्या 86 फीसद से अधिक हो गई है। वर्ष 1970-71 में सीमांत किसानों की संख्या 3.62 करोड़ थी, जो 2015-16 में बढ़कर 9.98 करोड़ पहुंच गई। जबकि बड़े किसान 27.66 लाख थे, उनकी संख्या घटकर 8.31 लाख रह गई है।

 

उत्तर प्रदेश में लघु व सीमांत किसान 92 फीसद से भी अधिक

 

देश में बडे़ किसानों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है। जिन राज्यों में भूमि सुधार नहीं हो सका है, उन राज्यों में बड़े किसानों की संख्या सर्वाधिक है। उदाहरण के तौर पर हरियाणा जैसे छोटे राज्य में बडे़ किसानों की संख्या 41 हजार है। जबकि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में मात्र 23 हजार बड़े किसान हैं। देश में बड़े किसानों की कुल संख्या 8.31 लाख हैं।

 

सीमांत किसानों की संख्या साढे़ तीन करोड़ से बढ़कर हुई दस करोड़

 

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक छोटे आकार के खेतों के लिए उपयुक्त मशीनरी का भारी अभाव है। इससे उनमें आधुनिक खेती करना संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश में लघु व सीमांत किसान 93 फीसद हैं। इनके लिए दोजून की रोटी जुटाना भी आसान नहीं है, जिससे खेती पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।

 

राज्य में किसानों की कुल संख्या 2.38 करोड़ हैं, जबकि खेती 1.74 करोड़ हेक्टेयर है। पांच सालों के भीतर किसानों की संख्या में 2.13 फीसद की वृद्धि हुई है, जबकि खेती में एक फीसद की गिरावट आई है।