Speciality:

The Krishi Vigyan Kendra, Dist. Beed (M.S.) was established in 1992 by Indian Council of Agricultural Research, New Delhi and is run by Deendayal Research Institute, N. Delhi.  The Institute founded in 1968 by Hon. Shri. Nanaji Deshmukh, a veteran social worker, working for socio-economic uplift of downtrodden through self employment, health, education and moral behavior in various parts of the country.  The institute has its head quarter in Chitrakoot (U.P.) there are various projects which have been torch bearers in their own way in various aspects of human life.  The Ashram Shalas, Arogyadham, Udyamita Vidyapeeth, Krishi Vigyan Kendras, Swavalamban Abhiyan are few of them.  These are the models replicable in any part of the country.

Official Website: http://www.drikvkbeed.org/

MISSION OF INSTITUTE 
We do not stand for ourselves but for our kith and kin; our kith and kin are those who are oppressed and neglected.

PURPOSE
To bring about total transformation and development of society through designing and implementing a framework to achieve and sustain self-reliance in villages through the initiative, involvement and empowerment of the villagers with replicable, definable and tangible parameters. With above purpose the KVK has implemented all the mandatory activities like skill oriented short and long durational programme for farming community, front line demonstration, on farm trials & other extension activities.   

Mandates of the KVK:-
  • On-Farm Testing to identify the location specificity of agricultural technologies under various farming systems.
  • Organize front-line demonstrations to establish production potential of technologies on the farmer's fields.
  • Training of farmers to update their knowledge and skills on modern agricultural technology and extension personnel to orient them in the frontier areas of technology.
  • To work as Knowledge and Resource Center of agricultural technology for supporting initiatives of public, private and voluntary sector for improving the agriculture economy of the district.

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देवास ज़िला भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक ज़िला है। देवास शहर जिला मुख्यालय है।

देवास जिला मोटे तौर पर देवास की जुड़वां रियासतों के क्षेत्रों से मेल खाता है। जिला विंध्य रेंज में फैला है; जिले का उत्तरी भाग मालवा पठार पर स्थित है, जबकि दक्षिणी भाग नर्मदा नदी की घाटी में स्थित है। नर्मदा जिले की दक्षिणी सीमा बनाती है। जिला पूर्व में सीहोर जिले से, दक्षिण में हरदा और खंडवा जिलों से, पश्चिम में खरगोन और इंदौर जिलों से और उत्तर में उज्जैन और शाजापुर जिलों से घिरा है। देवास जिला उज्जैन संभाग का हिस्सा है। कहा जाता है कि उत्तराखंड के देवसाल रावत की उत्पत्ति पौराणिक राजा विक्रमादित्य के समय देवास में हुई थी। देवास भोपाल से लगभग 152 किलोमीटर (94 मील) और इंदौर से सड़क मार्ग से 40 किलोमीटर (25 मील) दूर है।

जिले का नाम जिला मुख्यालय शहर, देवास से लिया गया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह दो परंपराओं के आधार पर बना है। एक यह है कि देवास 300 फुट (91 मीटर) शंक्वाकार पहाड़ी के आधार पर स्थित है, जिसे चामुंडा पहाड़ी के नाम से जाना जाता है, जिसके शीर्ष पर चामुंडा का मंदिर स्थित है। देवी की छवि एक गुफा की दीवार में कटी हुई है, जिसे देवी वशिनी या देवी के निवास के रूप में जाना जाता है। इसी से देवास (देव-वास) नाम की उत्पत्ति हुई प्रतीत होती है। संभावित उत्पत्ति का दूसरा दृष्टिकोण शहर के संस्थापक देवास बनिया के नाम से है।

आलू, धान व गेहूं के पश्चात् मानव उपभोग हेतु तीसरी प्रमुख खाद्य फसल है। पृथ्वी पर करोडों लोग आलू से पोषण प्राप्त करते हैं। सामान्यतः एशिया एवं यूरोप विश्व के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्र हैं एवं कुल आलू उत्पादन का 80 प्रतिशत सें अधिक उत्पादन करते हैं।

आलू भारत के लगभग सभी राज्यों में उगाया जाता है। प्रमुख आलू उत्पादक राज्य उ0प्र0, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, म.प्र., पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं असम हैं। भारतीय आलू क्षेत्र का विस्तार पंजाब, उत्तर-पूर्वद्ध से पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल तक है। 

मध्यप्रदेश भारत में आलू का पांचवा प्रमुख उत्पादक राज्य है। इस राज्य ने विगत 7-8 वर्षों के दोैरान आलू उत्पादन में लम्बी छंलाग लगाई है। इस अवधि के दौरान मध्यप्रदेश में आलू के क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता में अत्यधिक वृद्धि हुई है।

देवास के विकास के लिए एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत आलू का क्लस्टर विकसित किया जाएगा। हमारे आलू से चिप्स से लेकर बाकी चीजें बनेंगी। किसान को भी ठीक दाम मिलेगा और यहां की चीज यहीं प्रोसेस होकर यहां के लोगों को रोजगार भी देगी : मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan

देवास जिला आलू उत्पादन में प्रदेश में दूसरे नंबर है। देवास जिले में किसानों द्वारा 9 हजार 981 हेक्टेयर एरिया में लगभग 1 लाख 97 हजार मैट्रिक टन आलू उत्पादित किया जाता है। जिले के बागली अनुभाग के करनावद में फूड प्रोसिंग का कलस्टर बनाकर आलू चिप्स बनाने की इकाई शुरू की जा रही है। जिससे किसानों की आय दोगुनी होगी।