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जानिए वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की विधि के बारे में
जानिए वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की विधि के बारे में

वर्मीकंपोस्ट बनाने के लिए फसल अवशेष, वृक्षों की पत्तियां एवं पशुओं का गोबर आदि आवश्यक मूलभूत सामग्री हैं। कृषि अपशिष्ट, जैसे कि गन्ने की सूखी पत्तियां, घास-फूस, लकड़ी का बुरादा, नारिल अपशिष्ट, धान का छिलका, पशुओं का गोबर, बॉयोगैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी, भेड़, घोड़ा, सूअर, पोल्ट्री आदि का मल (कम मात्रा में) तथा सब्जियों के अपशिष्ट, वर्मीकंपोस्ट के लिए आदर्श खाद्य पदार्थ है।

वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की विधि
  • शेड निर्माण : एक उपयुक्त स्थान पर शेड बनाया जाता और उसकी छत पर छप्पर डालना अच्छा रहता है। यह शेड, यूनिट के परिणाम के अनुसार छोटा या बड़ा हो सकता है किंतु इसका न्यूनतम परिणाम 300 वर्ग फुट (20x15) रखा जाता है ।
  • आधार तल निर्माण : ईंटों से बने कक्ष, लकड़ी के बक्सों, प्लास्टिक से बनी द्रोणियों अथवा मिट्टी के गमलों में वर्मीकंपोस्ट तैयार की जा सकती है। यदि खेतों के अपशिष्टों से कंपोस्टिंग करनी है तो एक टन क्षमता हेतु 10 फीट लम्बाई, 3 फीट चौड़ाई और 3 फीट ऊंचाई का बैड बना सकते हैं। इस बैड के आधार पर ईंट या पत्थर के टुकड़े रखे जा सकते हैं।
  • जैव - अपशिष्ट : इसमें सभी प्रकार के अपघटन योग्य अपशिष्टों का प्रयोग किया जा सकता है। ये अपशिष्ट, रसोई घर, फार्म, बाजार अथवा कृषि आधारित उद्योगों के अपशिष्ट और पशुओं के अपशिष्ट आदि हो सकते हैं। जैव - अपशिष्टों को इकट्ठा कर धूप में 7-10 घंटे रख दिया जाता है। यदि आवश्यक हो तो बड़े टुकड़ों को काट कर छोटा कर दें। ताकि उनका निम्नीकरण आसानी से हो सके। वर्मीकंपोस्ट तैयार करते समय पादप-आधारित अपशिष्टों का ही उपयोग करना चाहिए अर्थात जंतु मूल की सामग्री यथा, अंडों का खोल, मास, हड्डी आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, तंबाकू की पंत्तियां, प्याज, लहसुन, मिर्च आदि अपशिष्ट भी केंचुआ पालन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  • बैड भरना : टैंक के निचले हिस्से में एक या दो इंच तक गाय का सड़ा हुआ गोबर भरते हैं और उसके ऊपर 30 से.मी. की मोटाई तक जैव अपशिष्ट फैला दिए जाते है। अपशिष्ट की इस परत को गाय के गोबर की स्लरी और पानी से नम बनाया जाता है और फिर जैव अपशिष्ट की दूसरी परत फैला दी जाती है। जमीन से 45-60 से.मी. ऊंचाई तक इसी ढंग से जैव अपशिष्ट को भरा जाता है। इस सामग्री के ऊपर पानी के छिड़काव द्वारा नमी-स्तर बनाए रखा जाता है। इस प्रकार से जैव अपशिष्ट और गाय के गोबर का अनुपात 60:40 रखा जाता है।
  • केंचुआ छोडना : वर्मीकंपोस्टिंग में प्रायः केंचुए की दो जातियां, यूट्रिलस यूजीनी और आइसेनिया फोइटिडा का उपयोग किया जाता है। ये दोनों अफ्रीकन जातियां हैं और वर्मीकंपोस्टिंग के लिए बहुत उपयोगी हैं जबकि अधिकांश भारतीय जातियां इसके लिए उतनी उपयुक्त नहीं हैं। टैंक को जैव अपशिष्ट से भरने के बाद केंचुओं को 2-3 किग्रा / टन अपशिष्ट की दर से उसमें छोड़ा जाता है। यह 100 केंचुए प्रति वर्ग मीटर भी हो सकता है।
  • ढकना : पक्षियों और चूहों से सुरक्षा हेतु अपशिष्ट के ढ़ेर को मिट्टी की एक पतली परत या जाली से ढक दिया जाता है। चींटियों से सुरक्षा के लिए भी समुचित उपाय किए जाने चाहिए। सूर्य एवं वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए एक छत वाला शेड बनाया जाता है जिसमें दीवारें न बनाकर खुले रखे जाते हैं। इसी प्रकार से तीन महीने तक ढक कर रखते हैं।
  • हार्वेस्टिंग : जब कंपोस्ट की संरचना दानेदार हो जाती है तो यह हार्वेस्टिंग के लिए तैयार समझी जाती है। निम्नीकृत सामग्री को टैंक से बाहर निकालकर शेड में ढेर बनाकर रखा जाता है और इसे पानी से नम रखते हैं। केंचुए नीचे की परत में चले जाते हैं और नीचे की परतों को छानकर उन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है।