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टमाटर की खेती अतिरिक्त आय का एक बेहतर जरिया है, जानिए टमाटर की उन्नत किस्मों के बारे में
टमाटर की खेती अतिरिक्त आय का एक बेहतर जरिया है, जानिए टमाटर की उन्नत किस्मों के बारे में

जैसा की आप जानते है टमाटर की खेती अतिरिक्त आय का एक बेहतर जरिया है, क्योंकि टमाटर की खेती का व्यवसाय के रूप में अपना स्थान है। टमाटर की कई ऐसी किस्में विकसित की गई हैं जिनमें न तो अधिक कीट आक्रमण होता है और न ही अधिक रोग का प्रकोप होता है। इन किस्मों की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है। कीट एवं रोग न होने के कारण किसान कीट एवं रोगों पर होने वाले व्यय से बच जाते हैं। इससे किसानों को अधिक मुनाफा होता है। टमाटर की कई ऐसी किस्में हैं जिनकी भंडारण क्षमता अच्छी होती है। अतिरिक्त लाभ कमाने के लिए अच्छी भंडारण क्षमता वाली किस्मों को टमाटर की अनुपलब्धता के समय में संग्रहीत और बेचा जा सकता है।

टमाटर की खेती (Tomato Farming) शुरू करने से पहले टमाटर की किस्मों के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी माना जाता है। क्‍योंकि टमाटर की कई वैरायटी होती हैं जिनकी उपज और विशेषताएं अलग-अलग होती हैं। 

आइए जानते हैं कि टमाटर की खेती के लिए कौन-कौन सी किस्में हैं और इन किस्मों की क्या विशेषता है।
  • अर्का सम्राट (Arka Samrat)- यह अधिक उपज देने वाली एफ1, संकर किस्म है, इसके फल चपटे गोल, बड़े, गहरे लाल रंग के होते हैं। इसके फल का वजन 90 से 110 ग्राम तक होता है। यह किस्म ताजा बाजार के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 80 से 85 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • अर्का अपेक्षा (Arka Apeksha)- यह किस्म सॉस, केचप आदि बनाने के लिए उपयुक्त होती है। इसकी उपज क्षमता 800 से 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसके फल का औसत वजन 70 से 80 ग्राम तक होता है।
  • अर्का रक्षक (Arka रक्षक)- यह टमाटर की अधिक उपज देने वाली संकर किस्म है, इसके फल चौकोर से गोल, बड़े, गहरे लाल रंग के होते हैं। इसके फल का वजन 90 से 100 ग्राम तक होता है। यह किस्म ताजा बाजार और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 75 से 80 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • पूसा रोहिणी (Pusa Rohini)- इसके फल लाल, गोल, चिकने और मध्यम आकार के होते हैं, इसके फल का वजन 60 से 70 ग्राम तक होता है। यह किस्म लंबी दूरी के परिवहन और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 41 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है।
  • पूसा सदाबहार (Pusa सदाबहार)- इसके फल लाल, गोल और छोटे होते हैं साथ ही इसके फल चिकने और आकर्षक भी होते हैं। यह किस्म 25 से 35 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • पूसा उपहार (Pusa Uphaar) – इसके फल आकर्षक गोल, मध्यम आकार के होते हैं, टमाटर की इस किस्म के फल गुच्छों में लगते हैं, प्रत्येक गुच्छे में 4 से 6 फल होते हैं. यह किस्म 37 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है।
  • पूसा हाइब्रिड 8 (Pusa Hybrid 8)- इसके फल गोल, मध्यम आकार के होते हैं। यह किस्म पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लिए उपयुक्त है। इसके फलों का वजन 75 से 80 ग्राम तक होता है। यह किस्म 43 से 45 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • काशी अमूल (Kashi Amul) – इस किस्म का फल गोल होता है, इसके फल का औसत वजन 90 से 115 ग्राम तक होता है। यह किस्म रोपाई के 80 से 90 दिनों के बाद फलों की कटाई के लिए तैयार हो जाती है। बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। जबकि यह किस्म 50 से 60 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • धनश्री (Dhanashree) – यह अधिक उपज देने वाली किस्म है, इसके फल मध्यम गोल और नारंगी-लाल रंग के होते हैं। बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। वहीं, यह किस्म 45 से 50 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • हिसार ललित (Hisar Lalit)- टमाटर की यह किस्म चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित की गई है। इसके फल का औसत वजन 50 ग्राम तक होता है। यह किस्म 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
  • HS-101- यह किस्म सर्दी के मौसम के लिए उपयुक्त होती है, इसके फल गोल, छोटे से मध्यम आकार के और पकने पर लाल रंग के होते हैं। यह किस्म पत्ता मरोड़ विषाणु के प्रति सहिष्णु है। इस किस्म की औसत उपज 24 से 26 टन प्रति हेक्टेयर होती है।
  • फुले राजा (Phule Raja)- यह टमाटर की संकर किस्म है, यह किस्म गर्म एवं आर्द्र जलवायु के लिए उपयुक्त है। बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 100 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। जबकि यह किस्म 55 से 60 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।