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पशु चारे के लिए उत्तम चारा है बरसीम, जानिए बरसीम की उन्नत खेती के बारे में
पशु चारे के लिए उत्तम चारा है बरसीम, जानिए बरसीम की उन्नत खेती के बारे में

बरसीम, को उत्तरी भारत के सिंचित क्षेत्रों बरसीम, में चारे का राजा माना जाता है। यह चारा घास नवंबर से मई तक 4-6 कटाई देती है। यह एक पोषक, रसीला एवं स्वादिष्ट चारा है। इस हरे चारे को 'हे' में बदला जा सकता है। इसके साथ-साथ बरसीम उगाने से मृदा के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों में वृद्धि होती है, जिसके परिणामस्वरूप फसल की बेहतर उपज प्राप्त होती है।

जलवायु
बरसीम, ठंडी जलवायु के अनुकूल है। ऐसी जलवायु सर्दी व वसंत के मौसम में उत्तरी भारत में पाई जाती है, जो उत्पादक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। बरसीम की बुआई तथा विकास के लिए उचित तापमान 25° सेल्सियस है।

मृदा एवं उसकी तैयारी
अच्छी जल निकास वाली मिट्टी व दोमट मिट्टी, ह्यूमस, कैल्शियम व फॉस्फोरसयुक्त मृदा बरसीम के लिए उपयुक्त है। अपेक्षाकृत भारी मिट्टी ही उच्च जल धारण क्षमता के कारण अच्छी मानी गई है। बरसीम को क्षारीय मृदा में भी उगाया जा सकता है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा बाद की 2 या 3 जुताई देसी हल या कल्टीवेटर से करें। बरसीम | की जब बीज के लिए लाइनों में बुआई करते हैं तो इसके लिए भुरभुरी बीज शैय्या की जरूरत होती है।

बोने का समय
बुआई का समय एक महत्वपूर्ण कारक है, जो अंकुरण, कटाई की संख्या तथा उत्पादन को प्रभावित करता है। जब तापमान 25°-27° सेल्सियस हो तब बुआई करनी चाहिए, इसलिए पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में बुआई का उचित समय अक्टूबर है। बंगाल व गुजरात में फसल की नवम्बर में बुआई की जा सकती है।

प्रजातियां
मस्कावी, वरदान, बीएल-1, बीएल-10, जेबी-1, जेबी-2, जेबी-3, बरसीम 2 एवं बरसीम-3

बीज एवं बुआई की विधि
सामान्य स्थिति में बरसीम की बीज दर 25 कि.ग्रा./ हैक्टर है, जिससे उच्च तापमान के कारण होने वाली पौध मृत्यु की भरपाई हो सके। बुआई के लिए क्यारी में 4-5 सें.मी की गहराई तक पानी भरें। हल्का पलेवा करें। रात भर भीगे हुए बीजों को छोटी क्यारियां बनाकर उनमें पानी डालकर पलेवा करने के बाद छिड़काव करें। बुआई, शाम को या जब हवा नहीं चले, तब करें।

उर्वरक
बरसीम में बुआई के समय 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन व 80 कि.ग्रा. फॉस्फोरस/ हैक्टर उचित है।

कटाई एवं चारा उपज
पहली कटाई 50 दिनों पर तथा उसके बाद की 5-6 कटाई 28 दिनों के अंतराल पर करें। वैज्ञानिक तरीके से उगाई गयी फसल से 800-1100 क्विंटल हरा चारा/हैक्टर प्राप्त होता है।