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Ginger Farming: जानिए अदरक की खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें
Ginger Farming: जानिए अदरक की खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें

अदरक, भारतीय मूल की पूरे विश्व में उगायी जाने वाली एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है। कंद वाली फसलों में इसका अपना प्रमुख स्थान है। इसकी गांठों का प्रयोग व्यंजनों को खुशबूदार व चटपटा बनाने के अतिरिक्त मुरब्बा या अन्य खाद्य पदार्थ बनाने के काम में किया जाता है। आयुर्वेद के क्षेत्र में भी अदरक को कई प्रकार की बीमारियों में औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। प्रमुख रूप से इसका उपयोग सर्दी, जुकाम, पेट सम्बन्धी रोग, वात, श्वास सम्बन्धी रोग, पेचिश इत्यादि में किया जाता है। अदरक की गुणवत्ता मुख्य रूप से उसमें विद्यमान रेशे की मात्रा तथा तेल की उपलब्धता से मापी जाती है। अदरक को सुखाकर 15-20 प्रतिशत साँठ प्राप्त की जा सकती है।

बुआई का समय-अदरक की बुआई विभिन्न स्थानों पर अप्रैल से जून के बीच की जाती है। वर्षा देरी पर होने से बुआई 15 जून तक की जा सकती है।

अदरक की खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें
  • खेत में बुआई से पूर्व ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें। 
  • हमेशा अदरक की संस्तुत किस्मों के बीज की ही बुआई करें। 
  • रोगग्रसित कंदों की बुआई न करें।
  • बीज की बुआई से पहले बीज को मैंकोजेब (25 ग्राम) व कार्बेन्डेजिम (5 ग्राम) दवा का प्रति 10 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर आधा घण्टा के लिए उपचारित करें।
  • संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • खेत में वर्षा जल निकास की उचित व्यवस्था करें।
  • खड़ी फसल में निराई-गुड़ाई करने के पश्चात ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • फसल में बुआई से 55-60 दिनों एवं 85-90 दिनों में निराई-गुड़ाई अवश्य करें।
  • खड़ी फसल में उर्वरक छिड़कने के पश्चात पौधों में मिट्टी चढ़ाने का कार्य अवश्य करें।
  • कंदलन के लक्षण दिखाई देने के तुरन्त बाद रोगग्रसित पौधे को उखाड़ने के पश्चात ही भूमि में फफूंदनाशक दवाई का प्रयोग करें।
  • रोग व कीट प्रबंध के लिए फफूंदीनाशक एवं कीटनाशक दवाओं का प्रयोग उचित समय एवं लक्षण दिखाई देने पर ही करें।