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Vegetable Farming : जानिए सब्जी वाली फसलों का उत्पादन एवं प्रबंधन के बारे में

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Vegetable Farming : जानिए सब्जी वाली फसलों का उत्पादन एवं प्रबंधन के बारे में
Vegetable Farming : जानिए सब्जी वाली फसलों का उत्पादन एवं प्रबंधन के बारे में

  • बंदगोभी की पूसा अगेती, गोल्डन एकड़ की बुआई इस माह में की जा सकती है। अच्छी प्रकार तैयार कर खेत में 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 120-60-60 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। बंदगोभी की नर्सरी में डम्पिंग ऑफ से बचाव के लिए ब्लैटॉक्स का 205 एम.एल. प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले बेसालीन 2.5 लीटर या स्टॉम्प 3.3 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव कर हल्की सिंचाई करें। अगेती फसल में सिंचाई रोपाई के तुरन्त बाद तथा उसके पश्चात साप्ताहिक अंतराल पर व मध्यम व पछेती फसल में 10-15 दिनों के अंतराल पर करें। खरीफ मौसम में टमाटर की पूसा सदाबहार, पूसा रोहिणी, पूसा-120, पूसा गौरव, पी-एच-2 और पी-एच-8 की रोपाई इस माह कर सकते हैं। हरी प्याज की रोपाई से पूर्व 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद या 8 टन नाडेप कम्पोस्ट खेत में मिला दें। अंतिम जुताई के बाद 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन. 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 40 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से खेत में अच्छी तरह मिला दें।
  • शिमला मिर्च, टमाटर एवं गोभी की मध्यवर्गीय प्रजातीयों की पौधशाला में बिजाई पूरे माह साप्ताहिक अंतराल पर कर सकते हैं।
  • बैंगन, मिर्च व भिंडी की फसलों में निराई-गुड़ाई व जल निकास तथा रोग एवं कीटों से रोकथाम की व्यवस्था करें। बैंगन में रोपाई के 30 दिनों बाद 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, मिर्च में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन तथा फूलगोभी में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें।
  • इस समय बैंगन में कोक्सीनेल्ला बीटल का प्रकोप होता है। इसकी रोकथाम के लिए क्विनालफॉस 2.0 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। साथ ही शूट और फ्रूट बोरर के लिए कार्बोरिल 2.0 ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करना चाहिए।
  • पूसा संकर-3 लौकी की बुआई अगस्त तक की जा सकती है। इस किस्म में लौकी की तुड़ाई 50-55 दिनों में शुरू हो जाती है।
  • कददूवर्गीय सब्जियों में प्रति हैक्टर 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 54 कि.ग्रा. यूरिया को दो भागों में बांटकर बुआई के 30 एवं 45 दिनों बाद टॉप ड्रेसिंग करें। कददूवर्गीय सब्जियों में मचान बनाकर उस पर बेल चढ़ाने से पैदावार में वृद्धि होगी और फल स्वस्थ होंगे। सभी सब्जियों में उचित जल निकास की व्यवस्था करें।
  • गाजर की पूसा मेघाली, पूसा यमदाग्नि व पूसा वृष्टि एवं मूली की पूसा चेतकी व पूसा देसी किस्मों की बुआई अगस्त तक की जा सकती है, जो कि 40-50 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • अदरक की फसल में 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 54 कि.ग्रा. यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग बुआई के 60-70 दिनों बाद करें। हल्दी की फसल में प्रति हैक्टर 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 87 कि.ग्रा. यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग बुआई के 60-70 दिनों बाद करें।
  • बेबीकॉर्न की अगस्त में बुआई करने से अच्छी गुणवत्ता वाली बेबीकॉर्न प्राप्त होता है।
  • परवल लगाने के लिए 15 अगस्त के आसपास का समय सर्वोत्तम रहता है। परवल की रोपाई 2x2 मीटर की दूरी पर 50 सें.मी. व्यास के 30 सें.मी. गहरे गड्ढे खोदकर उसमें आधा भाग मिट्टी एक चौथाई सड़ी गोबर की खाद व एक चौथाई बालू. 100 ग्राम नीम की खली, 5 ग्राम फ्यूराडन मिलाकर जमीन से 15 सें.मी. ऊंचाई तक भर देना चाहिए। मचान बनाकर परवल लगाने की दूरी 1.5x1.5 मीटर रखते हैं।
  • खीरा तथा अन्य सब्जियों में फलछेदक कीटों का हमला होने का खतरा बना रहता है। किसान भाइयों को दवाइयों का छिड़काव समय-समय पर करते रहना चाहिए। दवाई छिड़कने के एक सप्ताह बाद ही फल तोड़े तथा पानी से सब्जी अच्छी तरह धोयें। इस फसल में 1/2 बोरा यूरिया छिड़कें इससे फल अच्छे लगेंगे।
  • मिर्च की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई, सिंचाई व जल निकास की उचित व्यवस्था करें। पौधों की अच्छी वृद्धि नहीं है तो 50 कि.ग्रा. यूरिया खड़ी फसल में डालें तथा कीटों तथा रोगों से बचने के लिए 0.2 प्रतिशत इंडोफिल-45 व 0.1 प्रतिशत मेटासिस्टाक नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें। ग्वार तैयार फलियों की तुड़ाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। कीटों से बचाव के लिए 0.2 प्रतिशत मेटासिस्टाक नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें। मूली की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई की व्यवस्था करें। कीटों से बचाव के लिए 0.15 प्रतिशत मेटासिस्टाक नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें।
  • पालक पूर्व में बोई गई फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई करें। तैयार पत्तियों की कटाई करें और गड्डियां बनाकर बाजार भेजें।