• English
  • Hindi
  • Sign Up
  • Contact Us
    Contact us
    INDIA OFFICE
    Connect with Farmers and the world around you on KisaanHelpLine
    Agriculture Technology
    & Updates
    Farmers can get FREE tips on various aspects of farming.
    Tel: (+91)-7415538151
    Skype: yash.ample
    Email: info@kisaanhelpline.com
  • Learn Agro
Android app on Google Play
24/7 HELPLINE +91-7415538151

Black cumin (काली जीरी)

look at here product details, reports and much more

Black cumin (काली जीरी)

काली जीरी क्या है?

Black Cumin popularly known as “Kala Jeera” or “Kali Zeeri” in India. Major cumin seed producing state In India are Gujarat and Rajasthan.


काली जीरी एक औषधीय पौधा होता है। यह देखने में या आकार छोटी होती है। यह स्वाद में थोड़ी तीखी और तेज होती है और इसमें जरा सा तीखा पन भी पाया जाता है। इसके पौधे का स्वाद कटू (कडवा) होता है। यह हमारे मन और मस्तिष्क को ज्यादा तीव्र (उत्तेजित) करती है। यह बहुत लाभकारी पौधा होता है।
यह गर्म तासीर का होता है, यह सामान्य जीरे जैसा होता है लेकिन इसका रंग काला होता है और आम जीरे से कुछ मोटा होता है।

Black cumin is a medicinal plant. It is small to see or size. This tastes a little bit sharp and sharp, and it is also found in a tiny bit. The taste of its plant is bitter (bitter). It makes our mind and brain more intense (stimulated). It is a very beneficial plant.

It is hot, it is like normal cumin but its color is black and something is thicker than common cumin.

काली जीरी को किन किन नामों से जाना जाता है?
इसे आम भाषा में काली जीरी कहते है, लेकिन इसके अलग अलग नामों को जान लेना भी बहुत आवश्यक है।
1. अंग्रेजी में इसे black cumin seed कहा जाता है,
2. संस्कृत में कटुजीरक और अरण्यजीरक कहते हैं,
3. मराठी में कडूजीरें,
4. गुजराती भाषा में इसको कालीजीरी ही कहते हैं
5. लैटिन भाषा में वर्नोनिया एन्थेलर्मिटिका (Vernonia anthelmintika) कहा जाता है।

Climate required for Cumin farming:-  In india best climat for JEERA Crop is a Rabi. Cumin crop does not grow well in humid and heavy rainfall climatic conditions. It thrives well in moderate dry and cooler climate and sub tropical climate is ideal for Cumin cultivation.


Soil requirement for Cumin farming:- Cumin cultivation requires loamy & soft soils with good drainage supplemented with organic matter. If you are planning for commercial cultivation, should select a field in which cumin farming has not been taken up at least during last 3 to 4 years.


Propagation in Cumin farming:-  Commercial Cumin is mainly propagated through seeds.


Sowing in Cumin farming:- Best time for Cumin seed sowing is November to December as it requires moderate dry and cool climate.


Seed rate in Cumin farming:- 12 to 16 kg of cumin seedlings/hectare is more than enough.


Irrigation/Watering in Cumin farming:- A light watering is required soon after sowing the seeds and thereafter second irrigation should be applied 7 to 10 days after 1st irrigation. Subsequent irrigations should be given depending upon the soil type and climatic conditions. Last heavy irrigation should be given at the time of seed formation. Better to avoid irrigation at the time of seed filling because it increases the incidence of blight, powdery mildew, and aphid infestation.


काली जीरी के क्या क्या लाभ है?
 यह एक औषधीय पौधा है और बहुत सी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है, इसके मुख्य उपयोग निम्न है:
1. शुगर (डायबिटीज) पर नियंत्रण में उपयोगी
2. बालों की देखभाल और वृद्धि में लाभ
3. चरम रोगों में फायदेमंद
4. कोलेस्ट्रॉल घटाने में मदद करता है
5. पाचन शक्ति बढ़ाता है
6. पेट के कीड़े नष्ट करने में कारगर
7. खून साफ़ करती है
8. सफेद दाग (कुष्ठ)  में भी लाभप्रद
9. पेशाब सम्बन्धी समस्याओं में फायदा करती है
10. गर्भाशय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
11. मेथी और अजवाइन के साथ लेने पर वजन घटाने में उपयोगी
12. जहरीले जीवों के काटने या डंक लगने पर इसका उपयोग बहुत अच्छा होता है।
13. आम के अचार में भी प्रयोग किया जाता है।
14. कुछ सब्जियों में छौंक के साथ भी प्रयोग किया जाता है।

जिन लोगों को कब्ज या पेट वाली बीमारियाँ है। उनके लिए तो यह रामबाण औषधि का काम करती है। पेट की बीमारियों के लिए इसमें दो औषधि और मिलाकर प्रयोग किया जाता है। इन तीनों औषधियों को त्रियोग भी कहा जाता है।  तीनों औषधियों में मैथीदाना, जमाण और काली जीरी का सही अनुपात होता है। यह तीनों चीजें आपको आराम से मिल सकती हैं। और तीनों ही औषधीय गुणों से भरपूर हैं।
लेकिन यह गर्म तासीर की होती है और सभी के लिए उपयोगी और उपयुक्त हो यह आवश्यक नहीं है, इसलिए इसके प्रयोग से पहले किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य ले लें।

वजन घटाने के लिए काली जीरी का प्रयोग
a. निम्न सामग्री लें
1. 100 ग्राम मेथी (fenugreek seeds)
2. 40  ग्राम अजवायन (carom seeds)
3. 20 ग्राम काली जीरी
b. इन सब को अलग अलग हल्का भून लें
c. इस मिलकर “हवाबंद डब्बे” में रखें
d. एक चम्मच रोज सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करें
यह महिलाओं के लिए वजन घटाने का एक विशेष उपाय है, इस पाउडर से पाचन में भी सुधार होता है।

इस औषधि के अन्य भी बहुत लाभ हैं।
काली जीरी का ओषदियो में भी काफी प्रयोग  होता है जैसे-:  गठिया, हड्डियां, आँखों की रोशनी, बालों का विकास और शरीर में रक्तसंचार उत्तेजित होता है। कफ (खासी) में आराम मिलता है। शरीर की रक्तवाहिनियां शुद्ध होंगी। स्त्रियों में होने वाली तकलीफें दूर होती है।

Crop Chart:

No data available
Recent Videos
Kisaan Shop
© 2013 Kisaan Helpline by Kisan Help Desk, all rights reserved.