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किसान का कमालः खट्टी लस्सी से बना दिया जैविक कीटनाशक, बाजारी कीटानाशक फेल

पानीपत। खतरनाक कीट फसलों को किस कदर नुकसान पहुंचाते हैं, इसका अंदाजा सिर्फ एक किसान ही लगा सकता है। इन कीटों से बचने के लिए बाजार में उपलब्ध महंगे कीटनाशकों का प्रयोग करना पड़ता हैं। इन कीटनाशकों का बुरा असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इस खतरनाक कीटों का फसल पर प्रकोप कम करने और महंगी दवाइयों का प्रयोग बंद करने के लिए एक किसान ने जैविक कीटनाशक बनाया है। कैथल जिले के पूंडरी कस्बे के हजवाना गांव के किसान अमरीक सिंह ने खट्टी लस्सी से कीटनाशक तैयार किया है। अब लस्सी के घोल का छिड़काव कर हम खतरनाक कीटों को खेत से दूर भगा सकते हैं। यही नहीं इससे फसलों का उत्पादन भी बढ़ता है। जबकि इस पर लागत भी नाम मात्र ही आती है। ऐसे में खेत की उत्पादक क्षमता भी कम नहीं होती और लोगों को आर्गेनिक अनाज खाने को मिलता है।
ऐसे बनता है ये कीटनाशक
किसान अमरीक सिंह बताते हैं कि इस घोल को हर किसान अपने खेत में बना सकता है। इसमें अपने घर में ही तैयार 100 लीटर लस्सी में 200 ग्राम गुड़ डाला जाता है, साथ में तांबे का कोई टुकड़ा डाल देते हैं। 15 दिन तक इसे खेत में धूप में रख देते हैं। इसमें से करीब 35 लीटर घोल ऊपर की सतह पर रहता है। इसे अलग बर्तन में डाल लेते हैं।
एक लीटर का छिड़काव 100 लीटर पानी में करें
एक एकड़ में खड़ी फसल पर हर सप्ताह एक लीटर घोल व 100 लीटर पानी को मिलाकर छिड़काव करते रहें। चूंकि यह महंगा नहीं है, इसलिए किसान फसलों पर छिड़काव करें, ऐसे में कीट मरेंगे नहीं, बल्कि पौधे पर बैठते ही उड़ने लगेंगे। जबकि फसल के उत्पादन में भी इससे बढ़ोतरी होगी।
ताजी लस्सी से करें बीज का उपचार
एक लीटर ताजी लस्सी का 40 किलोग्राम बीज में मिलाकर हम बीज का उपचार कर सकते हैं। इसे हम किसी भी फसल के बीज पर प्रयोग कर सकते हैं। यही नहीं गौमूत्र से भी बीज का उपचार किया जा सकता है। किसान का दावा है कि बीज का उपचार करने के बाद बीमारी बहुत कम आती हैं।

फंगस भी नहीं आते
किसान के अनुसार जब उन्होंने आर्गेनिक खेती का कार्य शुरू किया तो पहले साल एक एकड़ में 10 क्विंटल तक गेहूं का उत्पादन हुआ था। अब यह उत्पादन बढ़कर 20 से 22 क्विंटल तक पहुच चुका है। खास बात यह है कि बीज उपचार व छिड़काव करने के बाद फसलों पर फंगस नहीं आते।
किसानों को सिखाएंगे
अमरीक सिंह ने गुड़गांव में करीब 500 किसानों को नए घोल को तैयार करने की विधि बताई। जबकि अब उनका लक्ष्य है कि वे देशभर के किसानों को इस बाबत जागरूक करेंगे। क्योंकि जब हमारे घर में ही दवाई है तो हम बाहर से क्यों खरीदें। इससे किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहेगी।