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ओंकारेश्वर के ओंकार पर्वत पर सेब पैदा कर रहे है संत शिवगिरी महाराज

मध्यप्रदेश के पश्चिमी निमाड़ इलाके की भीषण गर्मी के बीच यहां स्थित ओंकारेश्वर के ओंकार पर्वत पर सेब पैदा हो रहे हैं। दो साल पहले लगाए पौधे पेड़ बन गए हैं और पहली बार इन पर फल आए हैं। ये ठीक उसी तरह गुच्छों में दिखाई दे रहे हैं जैसा आम तौर पर पहाड़ी या ठंडे इलाकों में होता है। इनका आकर भी सामान्य सेब की तरह ही है। विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ओंकारेश्वर की इस धार्मिक नगरी में इस अजूबे की बेहद चर्चा है। रहवासी इसे यहां के एक संत की जुनून और श्रम का फल मान रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश के शोध संस्थानों और कृषि कॉलेज के वैज्ञानिकों में कौतूहल है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल साइंस, भोपाल और विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मानते हैं इस पर शोध होना चाहिए। बहरहाल, सबसे बड़ी बात यह है कि इस संत ने अथक परिश्रम कर इस बंजर भूमि को हरियाली से भर दिया है, जो की औरों के लिए प्रेरणा है।

267 सीढ़ियां चढ़कर नर्मदा के पानी से पिलाया पोधो को पानी 

ओंकार पहाड़ियां लगभग 18 साल पहले तक बंजर पड़ी हुई थी। इस पर हरियाली बिखेरने के लिए संत शिवगिरी महाराज ने नर्मदा के पानी से सिच कर श्री ओम शांति नर्मदाधाम आश्रम के आसपास 18 से 20 हजार विभिन्न प्रजातियों फल-फूल के हजारों पेड़-पौधों का बगीचा तैयार कर दिया है। शुरू के 14 साल तक तो वे सिचाई के लिए 267 सीढ़ियां चढ़कर नर्मदा से पानी लेकर आते थे। अब जाकर उन्हें नल का कनेक्शन मिला है। लगभग दो साल पहले वे कश्मीर से सेब के पेड़ों की कलम भी ले आए और उन्हें रोप दिया। अप्रैल से मई के बीच में इन पेड़ों पर सेब लगने लगे। संत शिवगिरी महाराज बताते हैं मैंने अन्न छोड़ रखा है। फल ही खाता हूं। आम, नींबू, संतरा, मौसंबी, अमरूद सभी तरह के फल के पेड़ लगाए हैं। ऐसे ही सेब की कलम ले आया था। वैज्ञानिक आधार की जानकारी नहीं है। मैं तो इसे भोलेनाथ की कृपा मानता हूं।

एक पेड़ पर लगे है 10 से 15 सेब

सेब आम तौर पर 0 से 5 डिग्री तापमान वाले ठंडे इलाकों में होता है। जबकि निमाड़ में इस बार गर्मियों में अधिकांश दिनों में तापमान 45 से 47 डिग्री के बीच रहा। इस तापमान में एक पेड़ पर 10-15 सेब लग रहे हैं। अभी सेब कच्चे होने से हरे और भूरे रंग के हैं। निमाड़ इलाके से वाकिफ उद्यानिकी विभाग के सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर एसएन पटेल का मानना है इतनी गर्मी में आमतौर पर फूल झड़ जाते हैं लेकिन इतने फल आना शोध का विषय है।