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Cumin (जीरा)

Look at our Crops productivity, reports and much more.

Over 2500 years ago, Indian farmers had discovered and begun farming many spices and sugarcane. It was in India, between the sixth and fourth centuries BC, that the Persians, followed by the Greeks, discovered the famous “reeds that produce honey without bees? being grown.
kisan

Cumin (जीरा)

जीरा की उन्नत खेती


परिचय - जीरा का वानस्पतिक नाम है, Cuminum cyaminum|जीरा मसाले वाली मुख्य बीजीय फसल है | देश का 80 प्रतिशत से अधिक जीरा गुजरात व राजस्थान राज्य में उगाया जाता है | देश का 80 प्रतिशत से अधिक जीरा गुजरात व राजस्थान राज्य में उगाया जाता है | यह विभिन्न खाद्य तैयारी स्वादिष्ट बनाने के लिए भारतीय रसोई में इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण मसाला है। जीरा बड़े पैमाने पर भी विशेष रूप से मोटापा, पेट दर्द और dyspesia जैसी स्थितियों के लिए विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। जीरे की औसत उपज (380 कि.ग्रा.प्रति हे.)पड़ौसी राज्य गुजरात (550कि.ग्रा.प्रति हे.)कि अपेक्षा काफी कम हैlउन्नत तकनीकों के प्रयोग द्वारा जीरे की वर्तमान उपज को 25-50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता हैl

(Introduction of Cumin:- Cumin seed is basically native to the Egypt and it now grows in  countries like in India, North Africa, China. Cumin popularly known as “Jeera” or “Zeera” in India  and It is an important spice used in Indian kitchens regularly for flavoring various food preparations. Cumin seeds are used in various ayurvedic-herbal medicines also especially for stomach pain, obesity, digestion and dyspesia. Major cumin seed producing state In India are Gujarat and Rajasthan.)


किस्में -


RZ-19
सीधा उपज है, गुलाबी फूलों और बोल्ड रोमिल अनाज के साथ जीरा के एक लंबे विविधता के रूप में अच्छी तरह से wilt करने के लिए सहिष्णु; 5.6 क्विंटल / हेक्टेयर की औसत उपज के साथ 120-140 दिनों में परिपक्व होती है।

(RZ-19 : This variety is tall variety of cumin with pink flowers, erect stems, and bold pubescent grains; tolerant to wilt as well as blight; matures in 4 months to 5 months with an average production of 6.0 quintals /ha.)


RZ-209
विल्ट और तुषार रोगों के लिए प्रतिरोधी गुलाबी फूल और बोल्ड, ग्रे, रोमिल अनाज के साथ जीरा का एक सीधा-बढ़ती विविधता;6.5 क्विंटल / हेक्टेयर की औसत उपज के साथ 140-150 दिनों में परिपक्व होती है।

(RZ-209: This Variety is an erect-growing variety of cumin with bold, grey, pubescent grains, pink flowers, resistant to wilt and blight diseases; matures in 145 to 155 days with an average production of  7.0 quintals /ha.)


जीसी-1
एक सीधा-बढ़ रही गुलाबी फूल और बोल्ड, रैखिक, आयताकार, राख भूरे रंग अनाज के साथ जीरा की विविधता; रोग wilt करने के लिए सहिष्णु; 7.0 क्विंटल / हेक्टेयर की औसत उपज के साथ 105-110 दिनों में परिपक्व होती है।

(GC-1: This variety is an erect-growing variety of cumin with bold, linear,  pink flowers and oblong, ash brown colour  grains; tolerant to wilt disease; start maturing in  3 months to 4 months with an average production of  7.0 quintals /ha.)

आवश्यक जलवायु :-


मॉडरेट उप उष्णकटिबंधीय जलवायु जीरा खेती के लिए आदर्श है। मामूली ठंडी और शुष्क जलवायु सबसे अच्छा है | यह अच्छी तरह से सूखा और कूलर मौसम की उपज और उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु जीरा बीज की खेती के लिए आदर्श है।
Climate required for Cumin farming:-  Cumin crop does not grow well in humid and heavy rainfall climatic conditions. It thrives well in moderate dry and cooler climate and sub tropical climate is ideal for Cumin cultivation.


खेती की आवश्यकता :-
जीरे की फसल बलुई दोमट तथा दोमट भूमि अच्छी होती है | खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिये | यदि आप वाणिज्यिक खेती के लिए योजना बना रहे हैं तो आपको उस क्षेत्र का चयन करना चाहिए जिसमें कम से कम 3 से 4 साल तक जीरा लगाया नहीं गया है।
Soil requirement for Cumin farming:- Cumin cultivation requires loamy soils with good drainage supplemented with organic matter. If you are planning for commercial cultivation, should select a field in which cumin farming has not been taken up at least during last 3 to 4 years.


जीरे की बुवाई :-
जीरे की बुवाई के समय तापमान 24 से 28° सेंटीग्रेड होना चाहिये तथा वानस्पतिक वृद्धि के समय20 से 25°सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त रहता हैl जीरे की बुवाई 1 से 25 नवंबर के मध्य कर देनी चाहियेl 12-15kg / हेक्टेयर का एक बीज की दर पर्याप्त है। यह प्रसारण और लाइन बुआई से बोया जाता है। बीज 10cm गहरी बोया जाता है।
Sowing in Cumin farming:- Best time for Cumin seed sowing is November to December as it requires moderate dry and cool climate. Seed rate in Cumin farming 12 to 16 kg of cumin seedlings/hectare is more than enough.


खाद एवं उर्वरक :-
जीरे कि फसल के लिए खाद उर्वरकों कि मात्रा भूमि जाँच करने के बाद देनी चाहियेl सामान्य परिस्थितियों में जीरे की फसल के लिए पहले 5 टन गोबर या कम्पोस्ट खाद अन्तिम जुताई के समय खेत में अच्छी प्रकार मिला देनी चाहियेl इसके बाद बुवाई के समय 65 किलो डीएपी व 9 किलो यूरिया  मिलाकर खेत में देना चाहियेl प्रथम सिंचाई पर 33 किलो यूरिया प्रति हेक्टयर की दर से छिड़काव कर देना चहिये l
Manures and Fertilizers in Cumin farming:- 12 to 15 tons of farm yard manure (FMY)/ha should be supplemented at the time of soil or land preparation. Afterwards, P2O5 dose of 20 kg /ha should be applied at the time of seed sowing, N of 30 kg /ha should be applied as top P2O5 dressing either in 2 equal splits or can be given single dose in 30 days after sowing.


सिंचाई :-
जीरे की बुवाई के तुरन्त पश्चात एक हल्की सिंचाई कर देनी चाहियेl ध्यान रहे तेज भाव के कारण बीज अस्त व्यस्त हो सकते हैंl दूसरी सिंचाई 6-7 दिन पश्चात करनी चाहियेl इस सिंचाई द्वारा फसल का अंकुरण अच्छा होता है तथा पपड़ी का अंकुरण पर कम असर पड़ता हैl इसके बाद यदि आवश्यकता हो तो 6-7 दिन पश्चात हल्की सिंचाई करनी चाहिये अन्यथा 20 दिन के अन्तराल पर दाना बनने तक तीन और सिंचाई करनी चाहियेl ध्यान रहे दाना पकने के समय जीरे में सिंचाई न करें lअन्यथा बीज हल्का बनता है l सिंचाई के लिए फव्वारा विधि का प्रयोग करना उत्तम है l
Irrigation/Watering in Cumin farming:- A light watering is required soon after sowing the seeds and thereafter second irrigation should be applied 7 to 10 days after 1st irrigation. Subsequent irrigations should be given depending upon the soil type and climatic conditions. Last heavy irrigation should be given at the time of seed formation. Better to avoid irrigation at the time of seed filling because it increases the incidence of blight, powdery mildew, and aphid infestation.


खरपतवार नियंत्रण :-
खरपतवार जीरा की खेती में एक गंभीर समस्या है। जीरे की  फसल में खरपतवारों का अधिक प्रकोप होता है क्योंकि प्रांरभिक अवस्था में जीरे की बढ़वार हो जाती है तथा फसल को नुकसान होता हैI जीरे में खरपतवार नियंत्रण करने के लिए बुवाई के समय दो दिन बाद तक पेन्डीमैथालिन(स्टोम्प ) नामक खरपत वार नाशी की बाजार में उपलब्ध3.3 लीटर मात्रा का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहियेI इसके उपरान्त जब फसल 25 -30 दिन की हो जाये तो एक गुड़ाई कर देनी चाहियेI यदि मजदूरों की समस्या हो तो आक्सीडाईजारिल (राफ्ट)नामक खरपतवार-नाशी की बाजार में उपलब्ध 750 मि.ली. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चहिये I
Control of grass in the field of Jimi: - Cumin in the bacteria is a major problem. In this, after sowing, the seed is needed for 1 month and 2 kites. Thin activity should be done during initial hoeing and weeding to destroy excess plants. Fry can be used in the chemical use of chemical substances. Applying pre-emerging tebridren or oxacadiazone to 0.5-kg -1.0 kg / ha or pre-plant floclonalen or per-nitetene per emergent neemeteleen is effective in 99 kg per hectare.


कटाई एवं गहाई :-
सामान्य रूप से जब बीज एवं पौधा भूरे रंग का हो जाये तथा फसल पूरी पक जाये तो तुरन्त कटाई कर लेनी चाहिय l पौधों को अच्छी प्रकार से सुखाकर थ्रेसर से मँड़ाई कर दाना अलग कर लेना चाहियेl दाने को अच्छे प्रकार से सुखाकर साफ बोरों में भंडारित कर लिया जाना चाहिये।
Harvesting & Yield of Cumin:- Before harvesting, Field is cleaned and wilt affected plants are removed. Harvesting is done by cutting the cumin plants with sickle. The plants should be stacked on clean floor for sun-drying. After sun-drying, seeds can be separated by light beating with sticks.
An average yield of 5 quintals /ha is achievable under proper irrigated management. Improved commercial varieties may yield up to 7.5 to 8 quintals /ha.


उपज एवं लाभ :- उन्नत विधियों के उपयोग करने पर उपयोग करने पर जीरे की औसत उपज 7-8 कुन्तल बीज प्रति हेक्टयर प्राप्त हो जाती हैl जीरे की खेती में लगभग 30 से 35 हज़ार रुपये प्रति हेक्टयर का खर्च आता हैI जीरे के दाने का 100 रुपये प्रति किलो भाव रहना पर 40 से 45 हज़ार रुपये प्रति हेक्टयर का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है
(Post harvest Management Cumin seed farming:- Fresh cumin seeds should be sun dried and then should be cleaned by using gravity separators. Then cumin seeds should be sorted, graded and then filled in sterilized gunny bags and stored for marketing.)

Cumin (जीरा) Crop Types

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